
जमशेदपुर : वैश्विक संकट कोरोना महामारी धीरे- धीरे लौहनगरी जमशेदपुर को अपनी चपेट में ले रही है. ऐसे में जमशेदपुर के लोगों के सामने बड़ी समस्या इस बात की आन पड़ी है कि मामूली रूप से बीमार या सड़क दुर्घटना वगैरह में घायल होने पर मरीज जाएं तो कहां जाएं. शहर के 3 बड़े अस्पतालों को कोविड-19 के रूप में सरकार और जिला प्रशासन के निर्देश के बाद प्रयोग में लाया जा रहा है. इनमें कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम, टीएमएच और टाटा मोटर्स अस्पताल शामिल है. वहीं दूसरी तरफ जमशेदपुर के निजी नर्सिंग होम और क्लीनिक लगभग बंद पड़े हैं. बहुत कम डॉक्टर ही शहर में प्रैक्टिस कर रहे हैं. अस्पताल में भी डॉक्टर सीधे मरीजों का इलाज करने से बच रहे हैं. वहीं शहर के लोगों की चिंता इस बात को लेकर और अधिक बढ़ गई है कि सर्दी, खांसी, बुखार होने पर भी डॉक्टर सीधे कोरोना जांच के बाद ही इलाज करने की बात कर रहे हैं. वही शहर के निजी अस्पताल टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में अब झारखंड से बाहर के लोगों को मंत्री, विधायक और सांसदों की पैरवी पर भर्ती कराया जा रहा है. विधायक मथुरा महतो को धनबाद से जमशेदपुर के टाटा मुख्य अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए लाया गया है जबकि सामान्य लोग अगर यहां इलाज कराने पहुंच रहे हैं, तो उन्हें बेड फुल होने का हवाला देते हुए भर्ती करने से मना कर दिया जा रहा है. इन सबके बीच वेंटिलेटर के अभाव में शहर के लोग ही मरने को विवश हैं. पिछले दिनों शहर के एक व्यवसायी को सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद टाटा मुख्य अस्पताल ले जाया गया था जहां वेंटिलेटर के अभाव में व्यवसाई ने दम तोड़ दिया था. आपको बता दें कोल्हान प्रमंडल का सबसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस निजी अस्पताल टाटा मुख्य अस्पताल ही है जहां ना केवल कोल्हान के तीनों जिलों, बल्कि बंगाल, उड़ीसा बिहार और झारखंड के भी अलग-अलग हिस्सों से गंभीर रोगों के इलाज के लिए मरीज पहुंचते हैं. ऐसे में इस अस्पताल में अगर शहरवासियों का ही इलाज ना हो तो यह चिंता का विषय है. गौरतलब है कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बनना गुप्ता जमशेदपुर से हैं लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था की अगर बात करें तो फिलहाल यहां के लगभग सभी अस्पतालों की स्थिति चरमरा गई है. ऐसे में शहर के लोगों की चिंता लाजिमी है. टीएमएच में पहले से ही लोड काफी ज्यादा है क्योंकि जमशेदपुर के कोविड मरीजों के अलावा सरायकेला-खरसावां और धनबाद और रांची और पश्चिम सिंहभूम के मरीजों को भी भेज दिया जा रहा है. जाहिर सी बात है कि यह संकट की स्थिति जरूर है.







