
जमशेदपुर : सरना धर्म कोड के लिए तीन बड़े संगठनों के द्वारा संयुक्त जन आंदोलन की घोषणा की गयी है. इसके तहत आगामी 15 अक्टूबर को चक्का जाम तथा 6 दिसंबर को रेल-रोड चक्का जाम करने की घोषणा की गयी है. गुरुवार को आदिवासी सेंगेल अभियान (एएसए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सालखन मुर्मू के कदमा स्थित आवास पर केंद्रीय सरना समिति, रांची के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की, महासचिव संजय तिर्की, संरक्षक भुवनेश्वर लोहरा,सचिव विनय उरांव, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, रांची के केंद्रीय महासचिव सत्यनारायण लकड़ा के साथ आदिवासी सेंगेल अभियान के रास्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू, केंद्रीय संयोजक सुमित्रा मुर्मू, सेंगेल महिला मोर्चा के पूर्वी सिंहभूम जिला अध्यक्ष जोबारानी बास्के, एएसए के कोल्हान प्रमंडल संयोजक किशुन हांसदा, जामदा प्रखंड अध्यक्ष मनोज कुमार मुरमू और अधिवक्ता तिलका मुर्मू की उपस्थिति में उक्त निर्णय लिया गया.
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत देश में संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत लगभग 15 करोड़ प्रकृति पूजक आदिवासियों को सरना धर्म कोड की मान्यता के लिए अब करो या मरो की तर्ज पर आंदोलन करना मजबूरी है, ताकि 2021 की जनगणना में सरना धर्म कोड शामिल हो जाए और भारत के आदिवासियों की भाषा, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा संभव हो सके. आगामी 15 अक्टूबर को 5 प्रदेशों झारखंड, बंगाल, बिहार, ओड़िशा, असम में रोड चक्का जाम तथा 6 दिसंबर 2020 को उपरोक्त 5 प्रदेशों में रेल-रोड चक्का जाम किया जायेगा. वहीं आदिवासी सेंगेल अभियान, केंद्रीय सरना समिति और अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की तरफ से आगामी 12 अक्टूबर को प्रेस क्लब, रांची में दोपहर 12:00 बजे एक पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा.







