
जमशेदपुर : जमशेदपुर को एड्स और एचआइवी से बचाने वाले योद्धा के रुप में पहचान बनाने वाले टीएमएच के सेवानिवृत चिकित्सक और स्किन स्पेशलिस्ट डॉ एचके गार्डिन का गुरुवार को निधन हो गया. वे 61 साल के थे. डॉ गार्डिन टीएमएच के प्रसिद्ध स्किन स्पेशलिस्ट थे जबकि वे एचआइवी-एड्स कोर कमेटी के चेयरमैन के तौर पर काफी वर्षों तक टाटा स्टील के लिए काम कर चुके थे. उनको टाटा स्टील के माध्यम से एड्स और एचआइवी की रोकथाम के लिए चलाये जाने वाले अभियान का नेतृत्वकर्ता भी बनाया गया था और वे देश और विदेशों में एड्स योद्धा चिकित्सक के रुप में जाने जाते थे. डॉ एचके गार्डिन साकची में रहते थे. 5 सितंबर को उनको सांस लेने में दिक्कत और तेज बुखार के बाद टीएमएच में भरती कराया गया था, जहां वे कोरोना पोजिटिव हुए थे, लेकिन 15 सितंबर को की गयी टेस्टिंग के बाद वे कोरोना नेगेटिव हो गये थे. इसके बावजूद उनको प्लाज्मा थेरेपी से लेकर रेमडिसीवर समेत कई दवाएं चलायी गयी थी, लेकिन गुरुवार की दोपहर करीब 12 बजे उन्होंने टीएमएच में ही अंतिम सांसें ली. उनकी मौत के बाद चिकित्सा जगत में शोक की लहर दौड़ गयी है. डॉ एचके गार्डिन को देश और विदेशों में एचआइवी एड्स के लिए काम करने के लिए कई सारे अवार्ड भी मिले थे. एक जून 2008 को उनको विश्व प्रसिद्ध संस्था ”टेरी” ने अंर्तराष्ट्रीय स्तर का अवार्ड दिया था, जिसके बाद उनको एक नयी पहचान मिली थी. टाटा स्टील को एचआइवी-एड्स को लेकर कई उपलब्धि हासिल कराने में भी डॉ एचके गार्डिन की अहम भूमिका रही है.

जमशेदपुर में कोरोना से हो चुकी है 4 चिकित्सकों की मौत
जमशेदपुर में इससे पहले 4 चिकित्सकों की मौत कोरोना के कारण हो चुकी है. एमजीएम अस्पताल के एक चिकित्सक की कोरोना से मौत हो चुकी है जबकि जमशेदपुर के पूर्व सिविल सर्जन की भी मौत कोरोना से हो चुकी है. इसके अलावा दो और चिकित्सकों की मौत हो चुकी है. इस कारण अब कोरोना की इस जंग में चार चिकित्सकों की मौत हो गयी है. डॉ एचके गार्डिन भी पहले कोरोना पोजिटिव पाये गये थे, लेकिन वे नेगेटिव होने के बावजूद उनकी मौत हो गयी, जो कोरोना से होने वाली मौत में नहीं गिने जायेंगे.






