जमशेदपुर : नगर की भोजपुरी की अग्रणी साहित्यिक संस्था ‘जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद्’ की ओर से स्थानीय तुलसी भवन के मानस सभागार में डॉ रसिक बिहारी ओझा ‘निर्भीक’ जयंती सह स्मृति सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद् के पूर्व प्रधान सचिव एवं भोजपुरी साहित्य जगत के युग पुरुष डॉ रसिक बिहारी ओझा ‘निर्भीक’ की जयंती के अवसर पर विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी भोजपुरी – हिन्दी साहित्य के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार एवं अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डॉ हरेराम त्रिपाठी ‘चेतन’ ( रांची) एवं वर्तमान अध्यक्ष डॉ महामाया प्रसाद ‘विनोद’ (पटना) को ‘निर्भीक स्मृति सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया. समारोह के मुख्य अतिथि, सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, विशिष्ट अतिथि द्वय अरका जैन विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ अंगद तिवारी एवं तुलसी भवन के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र मूनका ने संयुक्त रूप से “निर्भीक स्मृति सम्मान – 2026” के रूप में अंगवस्त्रम्, पगड़ी, श्रीफल, सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न, पुष्पगुच्छ एवं नगद सम्मान राशि प्रदान किया. इसके पश्चात् परिषद् के प्रधान सचिव डॉ अजय कुमार ओझा द्वारा सम्पादित नगर से प्रकाशित भोजपुरी पत्रिका “निर्भीक संदेश” के 28 वें अंक का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया. (नीचे भी पढ़ें)

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद अध्यक्ष डॉ प्रसेनजित तिवारी एवं संचालन सह सचिव डॉ संध्या सिन्हा ने किया. कार्यक्रम का आरंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं डॉ निर्भीक के चित्र पर पुष्पार्पण के बाद संयुक्त सचिव माधवी उपाध्याय की सरस्वती वंदना से हुई. ततपश्चात् प्रधान सचिव डॉ अजय कुमार ओझा ने अपने स्वागत वक्तव्य के दौरान उपस्थित साहित्य साधकों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए परिषद द्वारा पिछले तेरह वर्षो से दिये जाने वाले डॉ निर्भीक स्मृति सम्मान की विस्तार से चर्चा की. निर्भीक जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए परिषद के प्रकाशन सचिव श्री हरिहर राय चौहान एवं शहर जानी-मानी विदुषी डॉ रागिनी भूषण ने उनके व्यक्तित्त्व – कृतित्व के ढेर सारे अनछुए पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मानित अतिथि द्वय का साहित्यिक परिचय संयुक्त सचिव डॉ वीणा पाण्डेय ‘भारती’ एवं उपाध्यक्ष शैलेन्द्र पाण्डेय ‘शैल’ ने प्रस्तुत किया. (नीचे भी पढ़ें)

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि प्रभाकर सिंह ने परिषद् द्वारा पूर्वजों को याद किये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की. विशिष्ट अतिथि डॉ अंगद तिवारी ने कहा कि भोजपुरी की ताजगी मेरे मन को हमेशा आनंदित करती है. डॉ निर्भीक जी के कृतित्व को अधिकाधिक पढने और समझने की जरूरत है. सम्मानित अतिथि डॉ हरेराम त्रिपाठी चेतन ने कहा कि निर्भीक जी का यशोकाय और प्रभा बहुत ही विस्तृत और स्पृहणीय है. उनकी रचनाओं का पठन-पाठन होना चाहिए ताकि भोजपुरी के नए रचनाकार सीख सकें. (नीचे भी पढ़ें)
वे भोजपुरी के एकनिष्ठ तथा समर्पित रचनाकार और मनीषी थे. डॉ महामाया प्रसाद विनोद ने कहा कि डॉ निर्भीक ने न केवल विभिन्न विधाओं में लेखन किया, बल्कि कई नए लोगों की रचनाशीलता को भी प्रशिक्षित किया. डॉ निर्भीक के काम को आगे बढ़ाते हुए हमें जनभाषा भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रखंड और जिला स्तर तक आंदोलन की आवश्यकता है. सूरज सिंह राजपूत द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस अवसर पर शताधिक साहित्यकारों सहित प्रेमी जन उपस्थित रहे.







