जमशेदपुर : बहुभाषीय साहित्यिक संस्था ‘सहयोग’ एवं विद्यादीप फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘डॉ. वीणा रानी स्मृति सम्मान समारोह’ साहित्य, कला, शिक्षा और संस्कृति का अविस्मरणीय उत्सव बन गया. रविवार संध्या कदमा स्थित कुडी महंती ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करनेवाले विद्वानों, शिक्षकों एवं साहित्यकारों को विभिन्न सम्मानो से अलंकृत भी किया गया. (नीचे भी पढ़ें)

पद्मा प्रसाद की सहयोग गीत की प्रस्तुति के उपरांत डीबीएमएस कॉलेज की छात्राओं ने पामेला घोष दत्ता के निर्देशन में पंच तत्वों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया, जिसके पश्चात मां सरस्वती एवं डॉ वीणारानी श्रीवास्तव के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई. संस्था की अध्यक्ष डॉ संध्या सिन्हा ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की साहित्यिक – सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी दी. डॉ अनिता राकेश ने डॉ वीणारानी श्रीवास्तव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को भावपूर्ण शब्दों में स्मरण करते हुए उनके सामाजिक, पारिवारिक एवं शैक्षिक योगदान को रेखांकित किया. (नीचे भी पढ़ें)

मुख्य अतिथि, जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि डॉ वीणारानी श्रीवास्तव सिर्फ एक साहित्यकार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, वैचारिक समृद्धि एवं मानवीय संवेदना की सशक्त प्रतीक थीं. उन्होंने उनके साथ जुड़े संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व अनेक आयामों वाला था तथा उनके विचार आज भी समाज का मार्गदर्शन करते हैं. (नीचे भी पढ़ें)

विशिष्ट अतिथि डॉ मीरा मुंडा ने आयोजन को भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को सशक्त करनेवाला बताया जिसमें अपने पूर्वजों एवं साहित्य-साधकों के योगदान का सम्मान किया जाता है. उन्होंने डॉ. वीणा रानी श्रीवास्तव को मानवीय मूल्यों की संवाहिका बताते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया. (नीचे भी पढ़ें)
समारोह में ‘सहयोग निधि सम्मान’, ‘साहित्य सृजन सम्मान’, ‘वैदुष्यमणि डॉ. वीणा रानी सम्मान’ तथा ‘डॉ. वीणा रानी ‘प्रभा’ सम्मान’ प्रदान किए गए. विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सम्मानित व्यक्तित्वों का अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न एवं प्रशस्ति-पत्र देकर उनका अभिनंदन किया गया. (नीचे भी पढ़ें)
सांस्कृतिक सत्र समारोह का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कालजयी कृति ‘उर्वशी’ पर आधारित भव्य नृत्य-नाटिका की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. डॉ रागिनी भूषण द्वारा नृत्य नाटिका की पूर्व पीठिका प्रस्तुत की गई, जिसके पश्चात कलाकारों ने उर्वशी एवं पुरुरवा के प्रथम मिलन से लेकर दैव योगात उर्वशी के वापस देवलोक गमन तक की कथा की नृत्य-प्रस्तुति दी. डॉ रागिनी भूषण की पटकथा एवं संवाद लेखन को अवतार सिंह के नाट्य निर्देशन, सुधा दीप के नृत्य निर्देशन को मंसूर सिद्दीकी के अद्भुत संगीत संयोजन में जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने ऐसा समां बांधा कि ऑडिटोरियम में उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे. प्रस्तुति के उपरांत सभी कलाकारों एवं निर्देशकों को सम्मानित किया गया.




