जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले (जमशेदपुर) में दुर्गा पूजा का समापन पूर्णतः शांतिपूर्ण एवं सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में हुआ. इस दौरान लोगों ने मां दुर्गा को भावभिनी विदाई दी और खुशहाली के साथ अगले साल फिर से मां के आगमन की गुजारिश की. इस दौरान लोगों ने नाच गाकर और ढांकी की थाप के साथ मां की प्रतिमा को विभिन्न नदी घाट और तालाबों में विसर्जित किया. . सभी प्रतिमा का बारी बारी के साथ विसर्जन संपन्न हुआ. इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ जमशेदपुर के साकची गोलचक्कर पर हुआ, जहां से अधिकांश दुर्गा पूजा का विसर्जन जुलूस निकला और स्वर्णरेखा नदी में प्रतिमा को विसर्जित किया गया. (नीचे भी पढ़ें)

पूर्वी सिंहभूम पूरे जिला में 440 (412 लाइसेंसी और 28 गैर लाइसेंसी) का शांतिपूर्वक संपन्न हुआ. जमशेदपुर में 315 दुर्गा पूजा का समापन हुआ. अकेले काशीडीह दुर्गा पूजा कमेटी ने शुक्रवार को प्रतिमा का विसर्जन किया. प्रतिमा विसर्जन सहित संपूर्ण आयोजन प्रशासनिक तैयारियों एवं सामुदायिक सहयोग के कारण सुचारू रूप से सम्पन्न हुआ. (नीचे भी पढ़ें)

इस अवसर पर उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, पूजा समितियों, केंद्रीय शांति समिति, एडीआरएफ टीम, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स, नियुक्त दण्डाधिकारियों सहित समस्त प्रशासनिक एवं पुलिस बल एवं जिला के नागरिकों का आभार व्यक्त किया. (नीचे भी पढ़ें)

उपायुक्त ने कहा कि दुर्गा पूजा जैसे बड़े पर्व के सफल संचालन में केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों, पूजा समितियों, स्वयंसेवकों एवं मीडिया की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही. सभी ने परस्पर सहयोग, अनुशासन एवं सौहार्द का परिचय दिया, जिसके कारण जिले में कहीं भी अप्रिय घटना नहीं हुई. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने विशेष रूप से विभिन्न पूजा समितियों का आभार जताया, जिन्होंने प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए भीड़-प्रबंधन, विसर्जन-व्यवस्था एवं यातायात नियंत्रण में सहयोग दिया. (नीचे भी पढ़ें)

साथ ही, एडीआरएफ व सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवानों ने घाटों व प्रमुख चौक-चौराहों पर सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया और जिला पुलिस बल ने सतर्कता व तत्परता के साथ चाक-चौबंद व्यवस्था सुनिश्चित की. (नीचे भी पढ़ें)

अपराध नियंत्रण, विधि-व्यवस्था संधारण एवं यातायात व्यवस्था को लेकर किए गए व्यापक प्रयासों की सराहना करते हुए उपायुक्त ने कहा कि सभी के आपसी समन्वय, अनुशासन एवं सहयोग से दुर्गा पूजा एवं विसर्जन का सफल, शांतिपूर्ण एवं सौहार्द्रपूर्ण आयोजन सम्भव हो पाया, जो जिले की सामूहिक एकजुटता और संस्कृति की पहचान है



