जमशेदपुर: राष्ट्रीय लोककथा दिवस के अवसर पर गीता थिएटर, जमशेदपुर के अभ्यासालय में झारखंड की समृद्ध लोककथा एवं लोक-संस्कृति को केंद्र में रखते हुए विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से स्नातक एवं रंगकर्मी गौतम तिवारी विशेष रूप से उपस्थित हुए.परिचर्चा के दौरान झारखंड की पारंपरिक लोककथाओं, जनजातीय संस्कृति, लोकविश्वास, मौखिक परंपराओं तथा लोककथाओं में छिपे सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदेशों पर विस्तार से चर्चा की गई. गौतम तिवारी ने कलाकारों और रंगकर्मियों से संवाद करते हुए कहा कि लोककथाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे किसी समाज की स्मृतियों, जीवन-मूल्यों, संघर्षों और सांस्कृतिक पहचान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं.(नीचे भी पढ़े)

उन्होंने कहा कि झारखंड की लोककथाओं में यहां की मिट्टी, जंगल, प्रकृति, जनजीवन और लोकपरंपराओं की गहरी छाप दिखाई देती है. इन कथाओं को रंगमंच के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है, ताकि हमारी लोक-सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके.इस अवसर पर गीता थिएटर के कलाकारों एवं रंगकर्मियों ने भी झारखंड की विभिन्न लोककथाओं को लेकर अपने विचार साझा किए तथा लोककथाओं को नाटक, नुक्कड़ नाटक और अन्य रंगमंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत करने की संभावनाओं पर चर्चा की.गीता थिएटर के सचिव प्रेम दीक्षित ने कहा गया कि संस्था भविष्य में भी झारखंड की लोककला, लोकसंस्कृति और लोककथाओं को मंच प्रदान करने तथा युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए निरंतर कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी.(नीचे भी पढ़े)

कार्यक्रम के अंत में गीता थिएटर परिवार की ओर से गौतम तिवारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी रंगकर्मी का कलाकारों के बीच आना युवाओं के लिए प्रेरणादायक अवसर है.इस मौके पर अन्नत सरकार, गंगा मंडल, ममता सिंह, पीयूष ठाकुर, आकाश साव, संदीप, गीता, सूरज पूर्ती, देवूसिह सरदार, तमान्ना राव, गीता थिएटर सचिव प्रेम दीक्षित और अध्याक्ष गीता कुमारी उपस्थित रहे.




