जमशेदपुर : जमशेदपुर के विभिन्न कंपनियों में कार्यरत स्थाई मजदूरों को तो बेहतर वेतन और बोनस की सुविधाएं हैं, लेकिन ठेका कंपनी में कार्यरत अधिकांश ठेका मजदूरों की हालत दयनीय है. इनकी न्यूनतम मजदूरी उन्हें ठीक से मिल भी रही है या नहीं इसकी शत-प्रतिशत मानिटरिंग नहीं होती.खासकर साफ-सफाई से जुडे़ असंगठित कामगारों की बुरी हालत है.ऐसे कामगारों के हित को ध्यान में रखते हुए बढ़ती महंगाई की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए झारखंड असंगठित मजदूर यूनियन की तरफ से इस साल मजदूर दिवस पर 1 मई को न्यूनतम मजदूरी 500 प्लस बीडीए की मांग संबंधी पत्र झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजा गया था. (नीचे भी पढ़ें व वीडियो देखें)
रविवार को एक प्रेसवार्ता कर यूनियन ने हैरान कर देनेवाली जानकारी साझा की. यूनियन के सचिव रमेश मुखी ने बताया कि जब मुख्यमंत्री को पत्र लिखे महीना भर से ज्यादा हो गया तब एक आरटीआई डाला गया, जिसमें सीएम को लिखे पत्र के संबंध में जानकारी मांगी गई. लेकिन ये आरटीआई लौटा दी गयी. संगठन के सचिव रमेश मुखी ने मुख्यमंत्री कार्यालय से लौटाए गए उस आरटीआई पत्र को पेश करते हुए अफसोस जाहिर किया. झारखंड असंगठित मजदूर यूनियन ने न्यूनतम मजदूरी 500 प्लस बीडीए की मांग के आंदोलन को और बड़ा करने का फैसला किया है. यूनियन ने ऐलान किया कि इस मांग को लेकर वृहद हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा जिसके तहत एक लाख मजदूरों का हस्ताक्षरयुक्त मांग पत्र सीएम को भेजा जाएगा. पत्र में मांग होगा कि आज के इस अत्यधिक महंगाई के दौर में वर्तमान न्यूनतम मजदूरी में घर चलाना मुश्किल है और ये न्यूनतम भी सबको ठीक से नहीं मिलती.सभी ठेका मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 500प्लस बीडीओ हो और सुनिश्चित हो कि श्रम कानून के तहत ये राशि मजदूरों को मिले.






