जमशेदपुर : झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (जेएचआरसी) के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने जमशेदपुर के चर्चित हिमांशु हत्याकांड को कानून-व्यवस्था की विफलता ही नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन और पुलिस की संदिग्ध भूमिका वाला जघन्य अपराध बताया है. मनोज मिश्रा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) एवं झारखंड उच्च न्यायालय को पत्र भेजकर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अपराधियों ने पुलिस की गाड़ी से हिमांशु को जबरन खींचकर चापड़ से जानलेवा हमला किया, जिसके बाद दो दिन तक जीवन और मृत्यु से संघर्ष करने के पश्चात उसकी अस्पताल में मौत हो गयी, वह पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है. मनोज मिश्रा ने कहा कि यह घटना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन है. अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ गरिमामय जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है. यदि कोई व्यक्ति पुलिस की मौजूदगी और पुलिस वाहन से भी सुरक्षित नहीं रह सकता, तो यह केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त जीवन के अधिकार की निर्मम हत्या है. उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला पुलिस की घोर लापरवाही, कर्तव्यनिष्ठा पर गंभीर सवाल और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. यदि पुलिस अपने संवैधानिक और वैधानिक दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करती, तो संभवतः हिमांशु आज जीवित होता. इसलिए इस मामले को केवल हत्या नहीं, बल्कि कर्तव्य में घोर लापरवाही एवं हत्या में संभावित सहभागिता के दृष्टिकोण से भी जांचा जाना चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)
जेएचआरसी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और झारखंड उच्च न्यायालय से मांग की है कि जिले के एसएसपी, संबंधित थाना प्रभारी तथा घटना के समय मौजूद सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध हत्या में सहभागिता, कर्तव्य में घोर लापरवाही एवं मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए. दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर सेवा से बर्खास्त किया जाए. सभी नामजद अपराधियों के विरुद्ध त्वरित सुनवाई कर कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जाए. मृतक हिमांशु के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए. पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा उच्चस्तरीय एसआईटी से कराई जाए ताकि पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो सके. मनोज मिश्रा ने कहा कि यह घटना केवल हिमांशु की हत्या नहीं, बल्कि कानून के शासन, मानवाधिकारों और संविधान की आत्मा पर सीधा हमला है. यदि पुलिस संरक्षण देने के बजाय मूकदर्शक बनी रहे तो जनता का कानून और शासन व्यवस्था से विश्वास उठना स्वाभाविक है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषी पुलिस अधिकारियों और अपराधियों के विरुद्ध शीघ्र एवं कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन राज्यव्यापी जनआंदोलन छेड़ेगा और न्याय मिलने तक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, झारखंड उच्च न्यायालय तथा अन्य सभी संवैधानिक मंचों पर संघर्ष जारी रखेगा.






