जमशेदपुर : जमशेदपुर के जुगसलाई नगर परिषद क्षेत्र में खरकई नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बाढ़ का पानी आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोकने के लिए बड़े नालों पर स्लुइस गेट बनाने का मुद्दा एक बार फिर उठाया गया है. इस संबंध में झामुमो के वरिष्ठ नेता एवं झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने राज्य सरकार के मंत्री हफीजुल हसन से मुलाकात कर उन्हें मांग पत्र सौंपा और इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया. प्राप्त जानकारी के अनुसार, जुगसलाई नगर परिषद की अध्यक्ष नौशीन खान की ओर से इस संबंध में पहले ही ई-मेल के माध्यम से मंत्री हफीजुल हसन को पत्र भेजा जा चुका था. इसी मामले को आगे बढ़ाते हुए हिदायतुल्लाह खान ने मंत्री से मुलाकात की और उन्हें मांग पत्र सौंपकर स्लुइस गेट के निर्माण की मांग की. (नीचे भी पढ़ें)
मांग पत्र में कहा गया है कि खरकई नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण बड़े नालों के रास्ते नदी से सटे निचले इलाकों में पानी प्रवेश कर जाता है. इसके चलते स्थानीय लोगों को हर वर्ष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. घरों में पानी घुसने से लोगों का जनजीवन भी प्रभावित होता है. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए जुगसलाई नगर परिषद की दूसरी प्रस्तावित बोर्ड बैठक में भी बड़े नालों पर स्लुइस गेट बनाने का प्रस्ताव रखा गया था. इसका उद्देश्य नदी का जलस्तर बढ़ने के दौरान पानी के बहाव को नियंत्रित करना और आवासीय क्षेत्रों को बाढ़ के पानी से सुरक्षित रखना है. मांग पत्र में जुगसलाई की गरीब नवाज कॉलोनी, हबीब नगर, इस्लाम नगर और शेख भाटा रोड स्थित बड़े नालों पर स्लुइस गेट बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है. इन स्थानों पर स्लुइस गेट बनने से संबंधित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बारिश के दौरान तथा नदी का जलस्तर बढ़ने से उत्पन्न होने वाली परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है. (नीचे भी पढ़ें)
हिदायतुल्लाह खान की ओर से इस मामले को उठाए जाने और मंत्री हफीजुल हसन को मांग पत्र सौंपे जाने के बाद मंत्री ने आश्वासन दिया है कि जल संसाधन विभाग की ओर से जल्द ही स्लुइस गेट का निर्माण कराया जाएगा. इस आश्वासन के बाद जुगसलाई के प्रभावित क्षेत्रों के लोगों में बाढ़ के पानी की समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है. स्थानीय स्तर पर इस निर्माण कार्य को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि खरकई नदी का जलस्तर बढ़ने के दौरान नालों के रास्ते आबादी वाले क्षेत्रों में पानी प्रवेश करने की समस्या पिछले कई वर्षों से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है.




