जमशेदपुर: लोक गायिकी से अपनी अलग पहचान बना चुकी मैथिली ठाकुर ने चार साल बाद एक बार फिर लौहनगरी आकर अद्भुत समां बांध दिया.ए पहुना मिथिला में रहो ना… जब बिष्टुपुर जी टाउन मैदान में गाया तो कोई ऐसा नहीं बचा जो झूम नहीं उठा.एक से बढकर एक चुनिंदा लोक गीतों की लगातार प्रस्तुति ने पूरा वातावरण को मस्ती से भर दिया. इस कार्यक्रम को देखने के लिए युवा वर्ग भी मौजूद था. कई लोगों ने पहली बार इतने उम्दा गीतों को ला इव देखा.मिथिला में होनेवाले शादी ब्याह और उस दौरान कई गतिविधियों से संबंधित गीतों को मैथिली ने अपने अंदाज में गाया तो लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया.(नीचे भी पढ़े)
चारों दुर्गा के बड़का कमाल सखिया , ललना लाल होहिएं और मेरा आपकी कृपा से गीत पर तो पूरा मैदान झूम उठा.मैथिली भजन, गजल, कीर्तन, गजल हर तरह की विद्या में कमाल की गायिकी से लोगों का दिल जीत लेती हैं.कार्यक्रम देखने आई महिलाओं और युवतियों में खासा उत्साह देखने को मिला. वही मैथिली ने लोगों से फरमाईश करने को कहा तब ज्यादातर ने विद्यापति के गीत गाने का निवेदन किया जिसे मैथिली ने पूरे मनोयोग से पूरा किया.गाने में हमेशा की तरह तबले और अन्य चीजों पर भाईयों रिषभ ठाकुर, अयाची ठाकुर और पिता रमेश ठाकुर ने साथ दिया.



