जमशेदपुर : मानगो नगर निगम की राजनीति में इन दिनों लगातार गर्माहट बनी हुई है. मेयर सुधा गुप्ता और स्थानीय विधायक सरयू राय के बीच चल रहे मतभेद के बीच अब मेयर के एक बयान ने पार्षदों की नाराजगी भी बढ़ा दी है. मेयर के खिलाफ पार्षदों ने खुलकर विरोध जताया है और उनके बयान को जनप्रतिनिधियों का अपमान बताया है. हाल ही में मानगो नगर निगम के पार्षदों ने अपना अलग संगठन बनाया है. अब इस संगठन को डिप्टी मेयर राहुल कुमार का भी समर्थन मिल गया है, जिससे निगम की राजनीति में नया मोड़ आ गया है. पार्षदों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की राजनीति करना नहीं, बल्कि मानगो के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर काम करना है. (नीचे भी पढ़ें)
विवाद की शुरुआत मेयर सुधा गुप्ता के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि “मुझे मानगो की जनता ने चुना है, पार्षदों ने नहीं. पार्षद क्या कर रहे हैं, उससे हमें मतलब नहीं है. हमें केवल जनता से मतलब है.
मेयर के इस बयान पर पार्षदों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “पार्षद आसमान से नहीं टपके हैं. हमें भी जनता ने ही चुनकर भेजा है और हम अपने-अपने वार्ड की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं. उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान बनाए रखना आवश्यक है. इस बीच मेयर सुधा गुप्ता और विधायक सरयू राय के बीच जारी राजनीतिक टकराव ने भी पूरे विवाद को और हवा दे दी है. निगम की कार्यशैली और विकास कार्यों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद पहले से ही चर्चा में रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
पार्षदों ने आरोप लगाया कि नालियों की सफाई जैसे कार्यों का श्रेय भी मेयर अकेले लेने का प्रयास कर रही हैं, जबकि इन कार्यों में पार्षदों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. उनका कहना है कि विकास कार्य सामूहिक प्रयास से होते हैं और इसका श्रेय सभी जनप्रतिनिधियों को मिलना चाहिए. फिलहाल मानगो नगर निगम की राजनीति में जारी यह खींचतान चर्चा का विषय बनी हुई है. अब देखना होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है और इसका मानगो के विकास कार्यों तथा निगम की कार्यप्रणाली पर क्या प्रभाव पड़ता है.




