जमशेदपुर : 13 फ़रवरी को विश्व रेडियो दिवस है और इस खास मौके पर हम आपको मिलवाने जा रहे हैं जमशेदपुर के उस शख्स से, जिनके लिए रेडियो सिर्फ एक उपकरण नहीं बल्कि ज़िंदगी है. जमशेदपुर के कदमा उलियान के रहने वाले चिन्मय महतो से, जिन्हें लोग आज रेडियोमैन के नाम से जानते हैं. घर के अंदर ही इन्होंने रेडियो और ट्रांजिस्टर का एक अनोखा संग्रहालय बना दिया है. जहां 1960 के दशक से लेकर आज तक के करीब एक हजार रेडियो सुरक्षित रखे गए हैं. (नीचे भी पढे़ं)

जमशेदपुर का ये घर आज सिर्फ एक घर नहीं बल्कि रेडियो की दुनिया का एक अनोखा संग्रहालय बन चुका है. अलमारियों में सजे हुए सैकड़ों रेडियो और ट्रांजिस्टर, हर रेडियो अपने साथ एक दौर, एक कहानी और एक याद समेटे हुए है. चिन्मय महतो के निजी संग्रहालय में इस वक्त कुल 992 रेडियो और ट्रांजिस्टर मौजूद हैं, जिसमें देशी के साथ-साथ विदेशी कंपनियों के रेडियो भी शामिल हैं. मर्फी, बुश, फिलिप्स और अकाई जैसी नामी कंपनियों के रेडियो आज भी यहां सहेज कर रखे गए हैं और खास बात ये है कि इनमें से ज़्यादातर रेडियो आज भी चालू हालत में है. (नीचे भी पढे़ं)

चिन्मय महतो को रेडियो से लगाव पहली बार तब हुआ, जब साल 1962 में उनके पिता, जो भारतीय वायुसेना में थे, युद्ध से लौटते वक्त अपने बेटे के लिए एक छोटा सा ट्रांजिस्टर लेकर आए थे. यही वो पहला रेडियो था, जिसने चिन्मय महतो को रेडियो की दुनिया से जोड़ दिया. उस एक छोटे से ट्रांजिस्टर से शुरू हुआ सफर. आज एक पूरे मिनी रेडियो म्यूजियम तक पहुंच चुका है. करीब साठ वर्षों से चिन्मय महतो लगातार रेडियो सुनते आ रहे हैं, और उतने ही वर्षों से रेडियो का संग्रह भी कर रहे हैं.
चिन्मय महतो बताते हैं कि रेडियो मेरे लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं रहा, रेडियो मेरे जीवन का साथी बन गया है. मैंने करीब साठ साल से रेडियो सुना है. देश–विदेश के रेडियो स्टेशनों को हजारों पोस्टकार्ड और चिट्ठियां भेजीं, आज भी वो शौक जारी है. ताकि आने वाली पीढ़ी को पता चले कि रेडियो क्या था और कितना खास था. चिन्मय महतो के इस संग्रहालय में वॉयस ऑफ जर्मनी, वॉयस ऑफ अमेरिका, रेडियो रोमानिया और रेडियो बेलारूस जैसे विदेशी रेडियो स्टेशनों से आए पत्र और पोस्टर भी सुरक्षित रखे गए हैं. (नीचे भी पढे़ं)
चिन्मय महतो बताते हैं कि एक दौर था, जब झुमरी तिलैया से रेडियो पर फरमाइशी गीतों का प्रसारण सुनना हर श्रोता के लिए गर्व की बात हुआ करता था. रेडियो के ज़रिये खबरें, संगीत और खेल की दुनिया
लोगों तक पहुंचती थी, और यही वजह है कि रेडियो समाज का आईना बन गया. आज मोबाइल और इंटरनेट के दौर में रेडियो भले ही पीछे छूटता नजर आता हो लेकिन जमशेदपुर के रेडियोमैन चिन्मय महतो ने रेडियो की विरासत को सहेज कर
आने वाली पीढ़ियों के लिए ज़िंदा कर दिया है.







