चाकुलिया : चाकुलिया वन क्षेत्र में काजू के जंगल की भरमार है. यह वन क्षेत्र काजू के उत्पाद के लिए प्रसिद्ध है. चाकुलिया वन क्षेत्र में 22 सौ हेक्टेयर भूमि पर काजू के पेड़ है. हर वर्ष यहां वृहद पैमाने पर काजू के उत्पादन होते हैं. इन दिनों चाकुलिया के ग्रामीण क्षेत्रों में वन समिति और ग्रामीणों के लिए काजू के फल रोजगार का मुख्य श्रोत बना हुआ है. ग्रामीण रोजाना सुबह काजू जंगल में जाकर काजू संग्रह कर ग्रामीण महिलाएं और बच्चें समिति के पास 10-15 रूपए की दर से कच्चे काजू के फल को बैचकर रोजगार प्राप्त कर रहें हैं. चाकुलिया के नीमडीहा गांव से सटे काजू जंगल से ग्रामीण काजू संग्रह कर समिति को बैच रहें हैं. ग्रामीणों ने बताया कि रोजाना वे सुबह जंगल जाकर काजू पेड़ से काजू के बीज तोड़कर समिति को बेचते है. कहा कि रोजाना 80-100 रूपए की रोजगार कर लेते हैं. (नीचे भी पढ़ें और देखें वीडियो)
क्षेत्र में नही है काजू प्रोसेसिंग प्लांट, यहां के काजू से बंगाल के व्यापारी होते हैं मालामाल- चाकुलिया वन क्षेत्र में काजू के उत्पादन के बावजूद भी यहां काजू प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है. काजू प्रोसेसिंग प्लांट नहीं होने के कारण चाकुलिया के काजू पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के व्यापारी खरीद कर ले जाते हैं जिससे बंगाल के व्यापारी यहां के काजू से मालामाल होते हैं. (नीचे पढ़ें पूरी खबर)
काजू संग्रह कर बंगाल के व्यापारी को बेचते हैं समिति- वन समिति के सदस्यों ने बताया कि काजू जंगल से ग्रामीणों के सहयोग से काजू संग्रह कर उसे सुखाकर पश्चिम बंगाल के व्यापारियों के पास बैठते है. समिति के सदस्यों ने कहा कि हर वर्ष काजू बैचकर समिति को अच्छा मुनाफा होता है जिससे वे गांव के विकास के लिए खर्च करते हैं. समिति के सदस्यों ने कहा कि काजू की बिक्री पर 10 प्रतिशत मुल्य विभाग को देते हैं बाकी रकम समिति के पास रहता है. (नीचे भी पढ़ें)
विभाग द्वारा प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया है पर चालू नही- इस संबंध में रेंजर दिग्विजय सिंह ने दूरभाष पर बताया कि वन विभाग द्वारा क्षेत्र में काजू प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया है परंतु अब तक शुरू नहीं हो पाया है. कहा कि विभाग द्वारा जल्द ही प्लांट को शुरू करने की दिशा में पहल की जाएगी ताकि काजू के उत्पादन से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सके.



