अन्नी अमृता / जमशेदपुर / पोटका : जिंदगी किसी के साथ क्रूर मजाक करती है. पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड के गोंगाडीह पंचायत के मांघुआ गांव की रहनेवाली 23 वर्षीय गायत्री पात्रो की कहानी पढ़कर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे. बचपन में ही पिता को खो चुकी गायत्री अपने माता-पिता की इकलौती संतान है. जब वह 12 वर्ष की थी तब उसे थैलासीमिया बीमारी ने जकड़ लिया और तब से उन्हें हर महीने खून चढ़वाना पड़ता है. तबीयत खराब रहने की वजह से गायत्री अपनी मां पर आश्रित रही. मां मजदूरी करके घर चलाती रही. लेकिन दु:ख खत्म कहां होनेवाला था. चार महीना पूर्व मां भी चल बसी. इस प्रकार गायत्री पात्रो पूरी तरह अनाथ हो गई. ऐसे में नील दीप निशक्त सेवा अभियान के संचालक और पूर्व जिला पार्षद करूणामय मंडल उसकी मदद को आगे आए. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने देखा कि गायत्री का पूर्व में एक दिव्यांग प्रमाण पत्र सदर अस्पताल में आयोजित कैंप में बनवाया गया था लेकिन तब प्रमाण पत्र में दिव्यांगता का प्रतिशत दर्ज नहीं हुआ था. उधर स्वामी विवेकानंद प्रोत्साहन भत्ता योजना आई जिसमें प्रतिशत की बाध्यता रखी गई. ऐसे में नील दीप निशक्त सेवा अभियान के तहत सदर अस्पताल ले जाकर गायत्री की शारीरिक जांच करवाई गई और फिर दिव्यांग प्रमाण पत्र सौंपा गया. साथ ही जरूरत के सभी कागजातों के साथ स्वामी विवेकानंद निशक्त स्वावलंबन प्रोत्साहन भत्ते का फॉर्म भरवाया गया. इस कार्य में पारा लीगल वोलंटियर चयन कुमार मंडल का योगदान सराहनीय रहा. अब गायत्री को प्रोत्साहन भत्ता मिल सकेगा. (नीचे भी पढ़ें)
नील दीप निशक्त सेवा अभियान के बारे में- पूर्व जिला पार्षद करूणामय मंडल नील दीप निशक्त सेवा अभियान के संचालक हैं. इसके तहत पोटका इलाके में वे दिव्यांग लोगों की मदद करते हैं. वे उनका दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने से लेकर अन्य कार्यों में मदद करके दिव्यांगों तक सरकारी सहायता पहुंचाने के लिए सेतु का कार्य करते हैं. क्षेत्र में जोर शोर से यह अभियान चलाया जाता है. खासकर वैसे लोग जो खुद चलकर भाग-दौड़ नहीं कर सकते हैं उनकी इस अभियान के तहत मदद की जाती है. जो लोग उतने पढ़ें लिखे नहीं हैं और सरकारी योजनाओं से अनजान हैं उनको योजनाओं के प्रति जागरूक करके उन तक योजना का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया में मदद की जाती है.




