घाटशिला: किसी चिकित्साधीन रोगी एवं सिकल सेल तथा थैलेसीमिया के लिए अस्पताल में दवा और चिकित्सा जितना जरूरी है, कई बार उससे ज्यादा जरूरी रक्त,प्लेटलेट्स,प्लाज्मा का होता है. समय पर रक्त और रक्त के घटक मिल जाए तो ज़िन्दगी बच जाती है, और अगर यही नहीं मिल पाए तो सब कुछ समाप्त हो सकती है. रक्त के इसी अति महत्वपूर्ण आवश्यकता को समझते हुए धालभुमगढ के स्वपन कुमार महतो ने रक्तदान, प्लेटलेट दान तथा प्लाज्मा दान एवं मरणोपरांत अंगदान को अपने जीवन का मिशन बना लिया है. वे खुद अब तक 86 बार रक्तदान एवं सोमवार को तीसरी बार एसडीपी दान देकर कुल 89 बार रक्तदान कर चुके हैं. वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक संगठन कुड़मी संस्कृति विकास समिति बना कर मुख्यतः झारखंड राज्य के जिला पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला -खरसावां, रांची, पश्चिम बंगाल के जिला पुरूलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम एवं ओडिशा के जिला मयुरभंज एवं क्योंझोर आदि जगहों पर प्रतिवर्ष लगभग 100 के आसपास रक्तदान शिविर आयोजित करते हुए लगभग 10,000 इकाई तक रक्त संकलन करवा कर रक्तदान शिविर स्थल के निकटतम ब्लड बैंक में संग्रहित करवाते हैं,ताकि क्षेत्र में जरूरतमंद रोगियों तथा थैलेसीमिया बच्चों को आवश्यकतानुसार रक्त उपलब्धता में मदद हो सके. (नीचे भी पढ़े)
श्री महतो के यह मुहिम केवल मात्र रक्तदान शिविर स्थल तक सिमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद रोगियों को सम्पूर्ण झारखंड में किसी भी अस्पताल एवं इसके अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली के कुछ कुछ अस्पतालों में उन्होंने आवश्यकता अनुसार रोगियों को रक्त उपलब्ध करवाते रहे हैं. उन्होंने जहां जहां रक्तदान शिविर आयोजन की हैं वहां के रक्तदाताओं व समाजसेवियों और रक्तदान शिविर आयोजकों को जोड़कर एक व्हाट्सएप ग्रुप तैयार कर उस व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से रक्त मांग पत्र आते हैं एवं व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ही जरूरतमंद रोगियों को चिकित्साधीन अस्पताल से निकटतम ब्लड सेन्टर से रक्त उपलब्ध करवाते हैं. अभी वर्तमान में ऐसे 62 व्हाट्सएप ग्रुप वे संचालित करते हुए वे स्वयं अपने तत्वावधान में क्षेत्र के जरूरतमंद रोगियों को समय पर उनके जरूरत के अनुसार निरंतर रक्त उपलब्ध करवा रहे हैं. झारखण्ड के मुख्यमंत्री से लेकर अभी तक कई जिलों में तथा कई अन्य राज्यों में अपने इस निस्वार्थ सेवाभाव के लिए प्रशस्ति पत्र, मोमेंट्स से सम्मानित किए जा चुके हैं. इसी कड़ी में उनके इस सेवाभाव का आज एक और अनोखा नमूना देखने को मिला. जमशेदपुर स्थित टाटा मुख्य अस्पताल में बीते तीन महीने पार हुए एक अपरिपक्व बच्ची मां के गर्भ से छह महीने में ही जन्म ले ली. (नीचे भी पढ़े)
उसके जन्म के उपरान्त से ही उसके आवश्यक चिकित्सा के लिए रानी अस्पताल, राजधानी रांची ले जाया गया तथा वहीं उसकी बीते 95 दिनों से लगातार चिकित्सा चल रही है. इसी क्रम में इस बच्ची को लगातार रक्त मुहैया करवाया जाता रहा तथा आज जब इस नवजात शिशु कन्या को बी पॉजिटिव एसडीपी (रक्त घटक) की आवश्यकता पड़ी, तब आज स्वपन महतो ने स्वयं रांची जाकर एसडीपी दान कर नवजात शिशु कन्या की जान बचाने एवं स्वस्थ जीवन जीने को सहयोग किया और रानी अस्पताल पहुंच कर नवजात शिशु की कुशल क्षेम जाना. ऐसे अतुलनीय निस्वार्थ सेवा सत्कर्म भाव आज के वर्तमान दौर में विरले ही देखने को मिलता हैं. जनमानस को उनके इस निस्वार्थ सेवा सत्कर्म भाव से प्रेरणा लेकर उनके इस मुहिम में यथासंभव सहयोग करना चाहिए. ताकि समाज के अन्तिम वर्ग तक यह रक्त क्रांति पहुंचे और कोई चिकित्सधीन व्यक्ति एवं सिकल सेल थैलेसीमिया बच्चों कम से कम रक्त के अभाव में अपने प्राणों से हाथ न धोए.मिली जानकारी के अनुसार 5-6 सितंबर बिहार के दरभंगा जिले में एक अन्तर्राष्ट्रीय रक्तदान सम्मेलन में स्वपन महतो झारखंड से शिरकत करेंगे.




