गालूडीह : उल्दा के माता वैष्णो देवी धाम में चल रही शिव पुराण कथा के पांचवें दिन कथावाचक स्वामी हृदयानंद गिरि ने शिव विवाह की कथा सुनाई. उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने सबसे पहले सती से विवाह किया था. भगवान शिव का यह विवाह बड़ी जटिल परिस्थितियों में हुआ था. सती के पिता दक्ष भगवान शिव से अपने पुत्री का विवाह नहीं करना चाहते थे, लेकिन ब्रह्मा जी के कहने पर यह विवाह सम्पन्न हो गया. (नीचे भी पढ़ें)

एक दिन राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान कर दिया जिससे नाराज माता सती ने यज्ञ में कूदकर आत्मदाह कर लिया. इस घटना के बाद भगवान शिव तपस्या में लीन हो गए. उधर माता सती ने हिमवान के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया. तारकासुर नाम के एक असुर का उस समय आतंक था. देवतागण उससे भयभीत थे. तारकासुर को वरदान प्राप्त था कि उसका वध सिर्फ भगवान शिव की संतान ही कर सकती. उस समय भी भगवान शिव अपनी तपस्या में लीन थे. तब सभी देवताओं ने मिलकर शिव और पार्वती के विवाह की योजना बनाई. (नीचे भी पढ़ें)

भगवान शिव की तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव को भेजा गया लेकिन वह भस्म हो गए. देवताओं की विनती पर भगवान शिव पार्वती जी से विवाह करने के लिए राजी हुए. विवाह की बात तय होने के बाद भगवान शिव की बरात की तैयारी हुई. उनकी बरात में देवता, दानव, गण, जानवर सभी लोग शामिल हुए। भगवान शिव की बरात में भूत पिशाच भी पहुंचे. ऐसी बरात को देखकर पार्वती जी की मां बहुत डर गईं और कहा कि वे ऐसे वर को अपनी पुत्री नहीं सौंप सकतीं. तब देवताओं ने भगवान शिव को परंपरा के अनुसार तैयार किया, सुंदर तरीके से शृंगार किया इसके बाद दोनों का विवाह सम्पन्न हुआ. अज की कथा में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भी पहुंचे थे. उन्होंने माता वैष्णो के आगे शीश झुका कर सुख समृद्धि की कामना की.(नीचे भी पढ़ें)
मंदिर परिसर में धूमधाम से हुआ शिव विवाह संपन्न

उल्दा स्थित माता वैष्णो देवी धाम में शिव विवाह का आयोजन मंदिर समिति की ओर से किया गया। जिसमें सर्वप्रथम गणेश वंदना गाकर शिव विवाह का शुभारंभ किया गया. समारोह में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. विवाह के दौरान लोगों ने भजन गायन करके माहौल को शिवमय कर दिया. बरातियों के रूप में आये श्रद्धालु भगवान शिव के भजनों पर झूम उठे. बरात गालूडीह दुर्गा मंडप से निकलकर गालूडीह मुख्य बराज, अंडरपास, महुलिया चौक होते हुए वैष्णो देवी धाम पहुंची. इस दौरान जगह जगह बरातियों का स्वागत किया गया. बारातियों को शरबत आदि पिलाया गया. शिव विवाह के अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया. साथ ही विवाह संपन्न होने के बाद महाभोग ग्रहण किया.



