जमशेदपुर : जुगसलाई श्री राजस्थान शिवमंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा के छठे दिन कथावाचक आचार्य विनय कांत त्रिपाठी ने श्री गणेश जी के जन्म की कथा सुनाई. उन्होंने कहा कि श्री गणेश की ही सबसे पहले पूजा करने का विधान है, अपनी आमदनी का दसवां हिस्सा दान धर्म के लिए खर्च करिये, निश्चित रूप से सभी संकटों से मुक्ति मिलेगी. उन्होंने भगवान् श्री गणेश का जीवन वृतांत बताते हुए कुबेर की कथा भी सुनाई. उन्होंने बताया कि कैसे कुबेर ने गणेश जी को हरी दूर्वा, सिंदूर एवं मोदक चढ़ाकर अपने प्रति श्री गणेश का क्रोध शांत किया. (नीचे भी पढ़ें)

आचार्य जी ने भगवान कार्तिकेय एवं भगवान गणेश के विवाह के प्रसंग की कथा भी सुनाई, जिसमें पहले किसका विवाह हो, इसके लिए भगवान शिव ने शर्त रखी कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आ जायेगा, उसीका विवाह पहले होगा. भगवान् कार्तिकेय जहां मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए निकले, वहीं श्री गणेश ने अपने बुद्दि-बल से अपने माता-पिता की ही परिक्रमा करते हुए समस्त पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर अपने विवाह की शर्त जीत ली. (नीचे भी पढ़ें)

इसी तरह उन्होंने भगवान् पुंडरीक की कथा भी सुनाते हुए बताया कि घरों में अलग अलग देवताओं एवं पितरों का कहां-कहां स्थान होना चाहिए. इसके बाद उन्होंने त्रिपुरासुर का जीवनवृत्त एवं उसके वध की कथा भी आचार्य जी ने सुनाई. इसके बाद उन्होंने नंदीश्वर के प्राकट्य की कथा के साथ ही भगवान शिव के ही रुद्रावतार चिरंजीवी भगवान् श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव अत्यंत मनोहारी झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया. आचार्य त्रिपाठी ने कथा के अंत में आज शिव मंदिर परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी लगाया. (नीचे भी पढ़ें)

आज की कथा को सफल बनाने में राजस्थान शिव मंदिर के अध्यक्ष छीतरमल धूत, अरुण अग्रवाल, दीपक अग्रवाल रामुका, सांवरलाल शर्मा, विश्वनाथ शर्मा, पवन सिंगोदिया, पवन काबरा, कमल किशोर अग्रवाल, कैलाश अग्रवाल, प्रमोद सरायवाला, जगदीश धूत, सीताराम भरतिया, गणेश दायमा के साथ सक्रिय रहे. इनके अलावा आज की कथा में श्याम सुंदर रिंगसिया, ओमप्रकाश रिंगसिया, पंकज छावछरिया, दीपक पारीक, उमेश शाह, बजरंग सांवरलाल अग्रवाल. नथमल शर्मा. विष्णु कसेरा. मंटू अग्रवाल, सुशील, संजय गुप्ता भी शामिल रहे.



