
जमशेदपुरः ऐतिहासिक गुरुद्वारों की देखरेख करने वाली सिख संसद एसजीपीसी (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) और शिरोमणि अकाली दल शहादत देकर बनी है। स्वर्ण मंदिर संचालन के लिए 101वां साल में 15 नवंबर 1920 को संयुक्त पंजाब के प्रबुद्ध सिखों ने श्री अकाल तख्त में हुई बैठक में 140 प्रतिनिधियों का चुनाव किया था. इस संस्था ने गुरुद्वारों का प्रबंधन करने के लिए जमकर कुर्बानी दी और उसके बाद ही अंग्रेजी सरकार 1925 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एक्ट बनाने को मजबूर हुई. जानकारी देते हुए तख्त हरमंदिर श्री पटना साहिब कमेटी के महासचिव सरदार इंद्रजीत सिंह ने बताया कि तेजा सिंह समुंदरी हॉल में 101वां स्थापना दिवस मनाया गया. जिसमें अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, जत्थेदार ज्ञानी जगतार सिंह, शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, एसजीपीसी प्रधान बीबी जागीर कौर, महासचिव भगवंत सिंह सियालका सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे. इसमें बाबा दीप सिंह की शहादत पर भी प्रकाश डाला गया और सिखों को पंथ की आन बान शान एवं मर्यादा की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का आह्वान भी किया गया. (नीचे भी पढ़ें)
पंथिक क्षेत्र में सराहनीय सेवाएं देने वालों को सम्मानित किया-
महासचिव भगवंत सिंह ने सरदार इंद्रजीत सिंह के साथ ही ख्याति प्राप्त कविसर जसवीर सिंह मत्तेवाल को प्रतीक चिन्ह एवं सिरोपा देकर सम्मानित किया. इससे पहले शुक्रवार को सरदार इंदरजीत सिंह को मुंबई एवं नासिक की समस्त गुरुद्वारा कमिटीओं की ओर से भी प्रतीक चिन्ह देकर मुंबई में सम्मानित किया गया.




