
जमशेदपुर : राज्यपाल, झारखंड द्वारा केंद्र को प्रेषित रिपोर्ट से प्रतीत होता है झारखंड और झारखंडी भयंकर उबाल पर खड़े हैं. आदिवासी सेंगेल ( सशक्तिकरण ) अभियान का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू के नेतृत्व में दो मार्च को झारखंड के राज्यपाल से मिलकर 5 समाधान मूलक प्रस्ताव देंगे. जिसमें पांच आदिवासी और चार मूलवासी भाषाओं को पठन-पाठन, सरकारी कार्य और रोजगार आदि में प्राथमिकता देना, भारत के प्रकृति पूजक आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड संवैधानिक अधिकार है, जिसे अविलंब मान्यता जनगणना- 2021 में शामिल करना, आदिवासी- मूलवासी को न्यायसंगत आरक्षण प्रदान करना, सती प्रथा की तरह डायन प्रथा को आदिवासी गांव- समाज से झारखंड और पड़ोसी राज्यों में युद्ध स्तर पर खत्म करना, 1932 खतियान आधारित झारखंडी स्थानीयता नीति निर्धारण के मामले पर वायदा करनेवाले सरकारी पक्ष और मांग-आंदोलन करनेवाले अन्य के बीच आपसी रस्साकशी की बजाय मिल बैठकर इसका अविलंब हल निकाला जाए, तात्कालिक समाधान के लिए सभी सरकारी, गैर सरकारी नौकरियों का 90 फीसदी भाग ग्रामीण क्षेत्रों को आवंटित कर प्रखंडवार कोटा बनाकर केवल प्रखंड के आवेदकों से भरा जाए, इसे लेकर राज्यपाल को प्रस्ताव दिया जाएगा. (नीचे भी पढ़ें)
इस दौरान विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किये जाएंगे. जिसमें 30 अप्रैल को रांची जाना होगा. जिसमें राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त, सर्वाधिक बड़ी आदिवासी भाषा-संथाली को झारखंड की प्रथम राजभाषा बनाए जाने के लिए 30 अप्रैल रांची जाने की योजना बनायी जा रही है. वहीं 30 जून को सरना धर्म कोड को मान्यता दिलाने के लिए दिल्ली जाने की योजना बनायी गयी है. महान शहीद सिदो मुर्मू के गांव भोगनाडीह, साहिबगंज जिला, झारखंड में 5 मार्च को सेंगेल के नेता/ कार्यकर्ता, पूर्व सांसद सालखन मुर्मू के नेतृत्व में लक्ष्यों की प्राप्त करने के लिए शपथ सभा आयोजित की जाएगी. इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए झारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम के विभिन्न जिलों में जन जागरण सभाओं का आयोजन किया जाएगा. जिसके लिए 6 मार्च को महेशपुर, 7 मार्च को पाकुड़ जिला के गांधी मैदान, 8 मार्च को दुमका जिला, के गोयधा मैदान, 9 मार्च को टुंडी, धनबाद जिला, के गोला प्रखंड, 10 मार्च को रामगढ़ जिला, के पेटरवार, बोकारो जिला की सभा को सालखन मुर्मू, सुमित्रा मुर्मू और अन्य नेतागण संबोधित किया जाएगा.





