जादूगोड़ा : झारखंड शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् की निदेशक के हस्ताक्षर से मंगलवार 9 मई को जारी एक ताजा आदेश को लेकर झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ का पारा चढ़ गया है. संघ के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसका बहिष्कार करने का एलान कर दिया है. (नीचे भी पढ़ें)
शिक्षक संघ की की नाराजगी इस बात को लेकर है कि पूर्व में सरकारी स्कूलों के कक्षा 1 से 7 तक अध्यनरत छात्र-छात्राओं की वार्षिक परीक्षा 6 मई से प्रारंभ होकर 13 मई 2023 को समाप्त होने व 15 मई 2023 से स्कूलों में ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया था. परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन की तिथि 12 से 15 जून तथा परीक्षा फल प्रकाशन 30 जून को निर्धारित की गयी थी. इसके मद्देनजर शिक्षकों ने गर्मी की छुट्टियों को लेकर उसी हिसाब से अपनी प्लानिंग की थी. किसी को बच्चे का एडमिशन कराने बाहर जाना था तो किसी को इलाज के लिए, जिसके लिए उन्होंने दो-तीन महीने पहले ही टिकट बुक करा ली थी. इसी बीच निदेशक के नये निर्देश के आलोक में वार्षिक परीक्षा के मूल्यांकन एवं परीक्षा फल प्रकाशन की तिथि संशोधित कर दिया गया. इसके तहत ग्रीष्मावकाश अवधि में ही प्रश्न पत्र सह उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन तथा परीक्षाफल तैयार करने का काम गृह कार्य के तहत घर में करने एवं ग्रीष्मावकाश में ही 1 जून को स्कूल खोल कर छात्रों के माता-पिता की उपस्थिति में संगोष्ठी आयोजन कर रिपोर्ट कार्ड वितरित करने की जिम्मेदारी सौप दी गई है. इसका शिक्षक संघ के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने विरोध किया है.(नीचे भी पढ़ें)
शिक्षक संघ के नेता अरुण कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक ग्रीष्मावकाश को लेकर पहले से यात्रा का कार्यक्रम तय कर चुके हैं. इसके लिए उन्होंने टिकट भी बुक करा ली है. उक्त अवधि में अधिकांश शिक्षक अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए शहर से बाहर रहते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे में शिक्षकों को मानसिक व बौद्धिक रूप से प्रताड़ित कर जबरन कार्य कराने को दुखद एवं दुर्भाग्य पूर्ण एवं शिक्षक मर्यादा के प्रतिकूल करार दिया है. उन्होंने संघ की ओर से इस तुगलकी फरमान का विरोध करते हुए कहा कि जिले के शिक्षकों में काफी आक्रोश है. उन्होंने इसको लेकर शिक्षकों व तथा शिक्षा के हित में उक्त पत्र को तत्काल स्थगित करने की मांग उठाई है या राज्य के अन्य कर्मचारियों की भांति ग्रीष्मावकाश के बदले शिक्षकों को भी 33 दिन अर्जित अवकाश देने की मांग की है, अन्यथा संघ की ओर से इस फैसले का बहिष्कार करने की चेतावनी भी दी है.



