
लोहरदगा : झारखंड की प्रमुख पार्टी आजसू के पूर्व विधायक और पार्टी के संस्थापकों में से एक कमल किशोर भगत का शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनके अंतिम संस्कार के दौरान आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, सांसद सुदर्शन भगत, पूर्व विधायक सुखदेव भगत, भाजपा विधायक नवीन जायसवाल, ओमप्रकाश सिंह, प्रवीण सिंह समेत अन्य लोगों ने उनको अंतिम विदाई दी. कमल किशोर भगत का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव जिन्नी में किया गया. इस दौरान पुलिस गारद की सलामी दी गयी. परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल हो चुका था. सारे लोग बिलख रहे थे. बबलू दा के नाम से जाने जाने वाले कमल किशोर भगत लगातार राजनीति में सक्रिय रहे है. यहीं वजह है कि हर राजनीतिक दलों के लोगों ने उनको अपनी भावपूर्व विदाई दी. दूसरी ओर, उनकी पत्नी नीरू शांति भगत का इलाज रांची के अपोलो अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी हालत खराब है. वैसे उनकी मौत का रहस्य बरकरार है. उनकी मौत कैसे हुई है, यह अब तक तय नहीं हो पाया है. उनके पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार पुलिस को है. गौरतलब है कि कमल किशोर भगत शुक्रवार की सुबह अपने कमरे में संदेहास्पद परिस्थितियों में मृत पाये गये थे. उनकी पत्नी नीरू शांति भगत भी अचेत हालत में पायी गयी थी. उनका इलाज रांची के अपोलो में चल रहा है, जहां उनकी हालत स्थिर बनी हुई है. पुलिस का कहना है कि कमल किशोर भगत का पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. पुलिस सारे बिंदूओं पर जांच कर रही है. (नीचे देखे पूरी खबर)

एक साल पहले डीजीपी से मांगी थी सुरक्षा
आजसू के पूर्व विधायक कमल किशोर भगत 7 दिसंबर 2020 में पूर्व विधायक कमल किशोर भगत ने डीजीपी को पत्र लिखकर कहा था कि उनको जान का खतरा है और उनको जान से मारने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि लोहरदगा स्थित उनके आवास की कुछ दिनों से काले रंग की स्कार्पियो गाड़ी से रेकी की जा रही है. यह भी पता चला है कि उस गाड़ी में आपराधिक चरित्र वाले लोग रहते है, जिनके पास हथियार भी है. कमल किशोर भगत ने कहा था कि उनके क्षेत्र में घुमने के दौरान वे सभी उनका कई दिनों से पीछा कर रहे है और उनको जान से मारने की कोशिश कर रहे है. पुलिस जांच करें और तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बढ़ाये. उन्होंने आशंका जतायी थी कि अगर उनके आवेदन पर कार्रवाई नहीं हुई तो उनके साथ कुछ भी हो सकता है. ठीक एक साल बाद दिसंबर 2021 में ही उनकी मौत हो चुकी है. (नीचे देखे पूरी खबर)

2003 से राजनीति की हुई थी शुरुआत
लोहरदगा से विधायक रह चुके कमल किशोर भगत का राजनीतिक कैरियर 2003 में शुरु हुआ था, 2004 में कमल किशोर भगत पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े थे. इस चुनाव में उनको महज 6030 मत मिले. 2009 में उनको आजसू के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा गया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के सुखदेव भगत को 594 मतों से हराया. 2014 में कमल किशोर भगत लगातार दूसरी बार विधायक बने. इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट ने उनको दोषी करार दिया, जिसके बाद 2015 में उनको विधायक का पद छोड़ना पड़ा. इस बीच उन्होंने नीरू शांति भगत से शादी कर ली और अपनी जगह अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाया. लेकिन उनको हार का मुंह देखना पड़ा. 4 साल की सजा काटकर कमल किशोर भगत साल 2018 में जेल से छूटे. 2019 के विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी नीरू शांति भगत को उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन वे वहां से वित्त मंत्री और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांश से चुनाव हार गयी.





