
गढ़वा : झारखण्ड में मजदूरों की मौत भी थमने का नाम नहीं ले रही है. मजदूर अपनी गरीबी के कारण परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मजदूरी करने को विवश हैं. इसी कड़ी में झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड मुख्यालय में सेफ्टिक टैंक साफ करने के दौरान चार मजदूरों की मौत हो गयी. प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक नागेंद्र मेहता (20 वर्ष) एवं पिता मिथिलेश मेहता (40 वर्ष) दोनों बाप -बेटे की मृत्यु हो चुकी है. इसके अलावा अन्य दो लोगों को भी मृत्यु हो गयी है. चारो मृतक डूमरसोता गांव के रहने वाले है. बताया जाता है कि चारों मजदूर कांडी थाना के सामने किसी दुबे जी नाम के व्यक्ति के प्राइवेट मकान में काम कर रहे थे. जहां पर मकान परिसर में खोदे गए शौचालय के गड्ढे में चारों एकाएक नीचे गए और लगातार चार और व्यक्ति बेहोश हो गए हैं और उनकी मृत्यु हो गई. बाद में स्थानीय रेफरल अस्पताल के डॉक्टर शमशेर सिंह चारों को जांच उपरांत मृत घोषित कर दिया है. इस पहले भी ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, बावजूद भी लोग टंकी की सफाई मशीन के बजाए मजदूरों से कराने में बाज नहीं आ रहे है. जिससे आए दिन ऐसी घटना घट रही है. हादसे के बाद मजदूरों के घर में मातम पसर गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. इससे पूर्व देवघऱ में भी सेफ्टी टैंक की सफाई करने के दौरान दम घुटने से पांच- छह लोगों की मौत हो गयी थी. इस घटना के खिलाफ स्थानीय लोगों ने रोड जाम कर दिया. लोग मुआवजा की मांग कर रहे है.
जमशेदपुर में हो चुकी है दो लोगों की मौत, जुस्को अब रखती है सावधानी
जमशेदपुर के कदमा रानीकूदर स्थित सफाई सेंटर में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान उसमें डूबने से दो लोगों की मौत हो गयी थी. धातकीडीह क्षेत्र के रहने वाले दोनों मजदूरों की मौत के बाद टाटा स्टील की शत-प्रतिशत सब्सिडियरी वाली कंपनी जुस्को ने एहतियाती कदम उठाये है. इसके तहत किसी को अब सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए नहीं भेजा जाता है. वहां जहरीला गैस होता है, जिससे लोगों की मौत होती है. ऐसे में अब मशीनों से ही सेप्टिक टैंक की सफाई होती है और जाम को हटाया जाता है.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश है अब आदमी सेप्टिक टैंक में नहीं उतरेगा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सेप्टिक टैंक में हुए हादसे को रोकने के लिए सख्त आदेश दिये है. सुप्रीम कोर्ट का साफ निर्देश है कि कोई भी व्यक्ति सेप्टिक टैंक के अंदर घुसकर सफाई नहीं करेगा. इसके लिए मशीनों का उपयोग किया जाना है. इस आदेश के विपरित लोगों को अब भी सेप्टिक टैंक में उतार दिया जा रहा है, जिस कारण गढ़वा जैसा हादसा हो जा रहा है.







