
रांची : झारखंड सरकार ने पूर्ववर्ती रघुवर दास की सरकार के एक जनसरोकार वाले फैसले को ही पलट दिया है. सरकार ने राजस्व में हो रहे घाटे को कम करने के लिए एक रुपये में महिलाओं के लिए होने वाली रजिस्ट्री को ही समाप्त कर दिया है. इसके तहत महिलाओं के नाम पर 50 लाख रुपये तक की संपत्ति लेने पर एक रुपये में रजिस्ट्री हो जाती थी. 15 मई को इसके संबंध में भूमि सुधार विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिया गया. विभागीय सचिव कमल किशोर सोन के आदेश में कहा गया है कि अब एक रुपये में कोई रजिस्ट्री नहीं होगी. सामान्य तौर पर महिला और पुरुष का सामान तौर पर रजिस्ट्री वर्तमान में रजिस्ट्री दर से ही होगी. आपको बता दें कि झारखंड की रघुवर सरकार ने इसको 14 जून 2017 को लागू की थी. इसके तहत महिलाओं के नाम पर 50 लाख रुपये तक की संपत्ति लेने पर एक रुपये लेने का फैसला था. इस छूट का लाभ लेने वाली महिला को एक शपथ पत्र भी देना होता था. इसके तहत महिलाओं को बताना था कि उक्त महिला ने किसी तरह की कोई छूट अब तक नहीं ली है क्योंकि सरकार के नियम के मुताबिक, एक महिला को एक बार ही यह छूट मिलनी थी.
शराब का ऑनलाइन शुरू होगी बिक्री
भले ही सुप्रीम कोर्ट ने शराब की बिक्री को लेकर दायर करने वाली याचिका के याचिकाकर्ता पर ही एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया हो, लेकिन झारखंड की सरकार एक साहसिक फैसला लेने जा रही है. लॉकडाउन के बीच सरकार शराब बेचेगी. इसके तहत शराब की बिक्री ऑनलाइन तरीके से होगा और उसकी कीमत में 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी. इसके तहत लोग पहले ऑनलाइन टोकन को जेनरेट कर लेंगे, उसके बाद टोकन मिलने के बाद वे लोग दुकान से जाकर शराब ले सकेंगे. उनको शराब लेने के पहले पहचान पत्र दिखाना होगा, जिसकी इंट्री टोकन लेते समय करना होगा. इस टोकन की खासियात यह होगी कि एक व्यक्ति एक नंबर से एक ही टोकन निकाल सकता है और दूसरा टोकन तब तक नहीं निकलेगा जब तक पहले टोकन को निकालने का 48 घंटा पूरा नहीं हो जाता है.
महिला विरोधी है राज्य सरकार : रघुवर दास
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसको लेकर जारी प्रेस बयान में कहा है कि महिला सशक्तिकरण विरोधी राज्य सरकार ने 1 रुपये में रजिस्ट्री योजना बंद करने का जो निर्णय लिया है, वह निंदनीय है. महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने के लिए 50 लाख रुपये तक की संपत्ति के निबंधन पर 1 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया था. इस योजना का लाभ उठा कर वे मालकिन बन रहीं थी. उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा था. वर्तमान सरकार ने इसे बंद कर अपना महिला सशक्तिकरण विरोधी चरित्र उजागर किया है. यह सरकार जनविरोधी नीतियों के लिए जानी जायेगी. इससे पूर्व राजस्व उगाही के नाम पर हमारी भाजपा सरकार द्वारा पेट्रोल डीजल पर दी गयी रियायत वापस लेकर राज्य सरकार ने लोगों पर पहले ही बोझ बढ़ाया. अब राजस्व वसूली के नाम पर यह योजना बंद कर रही है. राजस्व वसूली के और भी कई उपाय हो सकते हैं. किसान विरोधी इस सरकार ने कृषि आशीर्वाद योजना भी बंद कर दी है. आखिर किसान, महिला समेत आम लोगों के साथ ऐसा सलूक क्यों?







