रांची : लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. झारखंड में भाजपा ने 14 में से 13 सीट के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा क दी है. इसमें एक सीट गिरीडीह आजसू के खाते में है. 13 सीट में से दस ऐसे प्रत्याशियों की घोषणा भाजपा ने की है, जो कहीं न कहीं किसी अन्य पार्टी से आये हुए है. ऐसे प्रत्याशी भी बनाये गये है, जो कभी न कभी भाजपा को छोड़कर दूसरे दलों में चले गये थे और उनकी घरवापसी करायी गयी. ऐसे लोगों को टिकट दिया गया है. वहीं, इस तरह के टिकटों के बंटवारें को लेकर अंदरखाने नाराजगी भी है कि बाहर से लोगों को लाया जा रहा है और लोकसभा का टिकट दे दिया जा रहा है जबकि विधानसभा चुनाव में भी ऐसा ही होता आया है. वैसे लोग जो पार्टी का झंडा विपरित परिस्थितियों में ढोये है, उनके लिए मायूसी के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है. ऐसे में भाजपा के नेता और कार्यकर्ता काफी मायूस है और दुखी भी है. इस राजनीतिक परिदृश्य पर आकलन किया जाये तो जमशेदपुर लोकसभा सीट से तीसरी बार टिकट पाने वाले विद्युत वरण महतो झामुमो से भाजपा में आये है. 2014 में उनकी भाजपा में इंट्री करायी गयी और दो बार सांसद भाजपा के रहे और तीसरी बार उनको टिकट दिया गया है. रांची के सांसद संजय सेठ भी भाजपा छोड़कर बाबूलाल मरांडी के साथ झाविमो में चले गये थे. वे झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता भी रहे थे. (नीचे भी पढ़ें)
भाजपा के खिलाफ आवाज बुलंद करते थे, लेकिन बाद में 2019 में उनकी घरवापसी हुई और सीधे रांची से लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया गया. ताला मरांडी राजमहल से प्रत्याशी बनाये गये है. ताला मरांडी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का विरोध कर दिया था, जिसके बाद उनको टिकट नहीं दिया गया था, जिसके बाद वे 2019 में बोरियो विधानसभा से चुनाव लड़ गये थे. 2022 में उनकी फिर से भाजपा में वापसी हुई और अब राजमहल से उनको प्रत्याशी बनाया गया है. इसी तरह बाघमारा से विधायक ढुल्लू महतो को धनबाद का टिकट दिया गया है. वे भी बाबूलाल मरांडी के साथ झाविमो में चले गये थे. वे झाविमो से विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे. बाद में फिर से वे भाजपा में आये और सीटिंग एमपी का काटकर ढुल्लू महतो को टिकट दे दिया गया. कालीचरण सिंह को चतरा लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया है. सीटिंग सांसद सुनील कसिंह की जगह उनको प्रत्याशी बनाया गया है. कालीचरण सिंह दो बार भाजपा छोड़े और फिर भाजपा में आये. इसी तरह गीता कोड़ा कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष रही और सांसद रही, लेकिन भाजपा में उनकी वापसी कराकर सिंहभूम संसदीय सीट से चुनाव लड़ाया जा रहा है. सीता सोरेन झामुमो से छोड़कर आयी, जिनको दुमका से टिकट दिया गया. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं, अन्नपूर्णा देवी राजद की विधायक रह चुकी थी, जिनको भाजपा ने पार्टी में 2019 में शामिल कराया और उनको टिकट देकर सांसद बनाया और फिर केंद्रीय मंत्री भी बनाया दिया गया. हजारीबाग से जयंत सिन्हा का टिकट काटकर मनीष जायसवाल को टिकट दिया गया है. वे भी बाबूलाल मरांडी के साथ झाविमो में चले गये थे. 2013 में वे भाजपा में शामिल हुए, जिसके बाद 2014 में उनको भाजपा से विधानसभा का टिकट दिया गया, फिर वे अभी विधायक भी है और फिर अभी लोकसभा का टिकट भी दे दिया गया. खुद केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा खरसावां से झामुमो के 1995 में पहली बार विधायक बने. इसके बाद वे भाजपा में शामिल होकर मुख्यमंत्री तक बने और अभी केंद्रीय मंत्री भी है. वैसे देखा जाये तो खांटी भाजपाइ सिर्फ समीर उरांव ही है, जिनको टिकट दिया गया है. वे लोहरदगा से चुनाव लड़ेंगे. गोड्डा से निशिकांत दुबे को टिकट दिया गया है, जो एस्सार ग्रुप के डायरेक्टर रहे थे, जो राजनीति में बाद में इंट्री की. वहीं, आइपीएस और पूर्व डीजीपी बीडी राम को 2019 में टिकट दिया गया, जो कभी भाजपा का झंडा नहीं ढोये थे.




