
रांची : झारखंड प्रदेश भाजपा के पास अपना कोई प्रदेश अध्यक्ष नहीं है. लक्ष्मण गिलुवा ने प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है. उनका इस्तीफा न तो नामंजूर ही किया गया है और न ही मंजूर किया गया है, इस कारण ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है. वैसे सूत्र बताते है कि फरवरी माह तक यहीं स्थिति रहेगी और लक्ष्मण गिलुवा कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष बने रह सकते है. वैसे भाजपा प्रदेश के महामंत्री दीपक प्रकाश का नाम भी प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए चल रहा है. वैसे अभी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से अमित शाह के हटने के बाद कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा को राष्ट्रीय अध्यक्ष का प्रभार दिया जा सकता है और संभव है कि जेपी नड्डा ही नये भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर सकते है. दिल्ली के विधानसभा चुनाव के बाद नयी राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा भाजपा कर देगी, जिसके बाद प्रदेश के अध्यक्ष की भी घोषणा होगी. भाजपा आलाकमान भी चुप्पी इस कारण लगायी हुई है क्योंकि पार्टी जानती है कि अगर प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा मंजूर कर लेते है तो पुरानी कमेटी को भंग करना होगा और फिर नेतृत्वविहीन पार्टी संचालित करना होगा. ऐसे में ना तो हां कर रही है और ना ही ना भाजपा कर रही है.

यहीं वजह है कि अभी प्रदेश अध्यक्ष के पद पर ऐसे ही बने रहने की संभावना है. आपको बता दें कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्षमण गिलुवा 25 दिसंबर 2019 को ही अपने पद से इस्तीफा दे चुके है. भाजपा की करारी हार के कारण उन्होंने स्वत: जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया है. दूसरी ओर, खूंटी से भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक व पूर्व मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा भाजपा विधायक दल के नेता हो
सकते हैं. उनका नाम लगभग तय माना जा रहा है. आदिवासी चेहरे के तौर पर उनका नाम लाया गया है जबकि गैर आदिवासी के तौर पर अगर नाम फाइनल हुआ तो सीपी सिंह को आगे किया जा सकता है. वैसे नीलकंठ सिंह मुंडा के नाम का सिर्फ औपचारिक घोषणा होनी बाकी है. हालांकि, भाजपा में विधायक दल के नेता को लेकर अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है. पार्टी ने अब तक विधायक
दल की बैठक नहीं बुलाई है. विधायक दल की बैठक में ही आम सहमति से विधायक दल का
नेता चुना जाता है. पार्टी सूत्रों की मानें, तो विधायक दल के नेता के तौर पर नीलकंठ सिंह मुंडा का नाम लगभग तय हो चुका है. भाजपा ने अपने सांसदों, विधायकों और पार्टी के पदाधिकारियों
के साथ एक दिवसीय कार्यशाला कार्यशाला आयोजित की है. इस कार्यशाला में सीएए को लेकर
पार्टी के स्टैंड को स्पष्ट करने के साथ ही अन्य कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा. कयास यह
भी लगाया जा रहा है कि कार्यशाला के बाद विधायकों के साथ औपचारिक बैठक की जा
सकती है, जिसमें विधायक दल के नेता का चयन किया जाएगा.





