
दुमका : झारखंड में सरना धर्म कोड को लागू करने को लेकर झारखंड विधानसभा में विशेष सत्र बुलायी जायेगी. यह जानकारी राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहीं. श्री सोरेन दुमका में शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. वे दुमका में चुनाव प्रचार के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बताया कि 15 नवंबर को झारखंड का स्थापना दिवस होगा. उससे पहले ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जायेगा. इसको लेकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से भी बात की है और बहुत जल्द विशेष सत्र बुलाने के लिए राज्य सरकार की ओर से राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा जायेगा. मुख्यमंत्री ने यहां बताया कि राज्य में सरना धर्म कोड को लेकर मामले उनके सामने आये है. मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरना धर्म कोड को लेकर उनके पास आया है. वे लोग चाहते है कि जनगणना में अलग धर्म कोड बनाया जाये क्योंकि देश के आदिवासियों के लिए इसमें कोई कॉलम नहीं है, जिसको लेकर काफी दिनों से डिमांड चल रहा है. पूर्व में आजादी के बाद से जनगणना में आदिवासियों को अलग स्थान दिया जाता रहा है. आज धीरे-घीरे इसको समाप्त करने की कोशिश हो रही है, जिससे आदिवासी समुदाय के लोग चिंतित है. आदिवासियों की हैसियत को ही मिटाने की यह कोशिश है और इस कोशिश को नाकाम सरकार करेगी. सरना धर्म कोड को जनगणना में लागू करने से आदिवासियों की अपनी पहचान बन सकेगी. अभी तो यह चिंता का विषय है कि आदिवासी समुदाय अपने को कहा रखेंगे, यह समझ नहीं आ रहा है क्योंकि उनकी पहचान के लिए अलग कोड जनगणना में दर्शाया ही नहीं गया है. उन्होंने कहा कि इस बारे में राज्यपाल से बातचीत हो चुकी है और विशेष सत्र में इसको पारित कराने के बाद केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जायेगा.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर बोला हमला
अपने संवाददाता सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि रघुवर दास की जुबान फिसलने का मामला नहीं रहता है, उनकी बोली और बोलने की शैली ही ऐसी है, जो गंदा आचरण होता है, वह भाजपा में ही दिखता है. पहले तो यह लगा था कि यह जुबान फिसलने का मामला है, लेकिन ऐसा नहीं है, रघुवर दास इस तरह का कदम उठाते रहते है. उन्होंने कहा कि भाजपा अपने साथ ऐसे लोगों को रखती है, यहीं चिंता का विषय है. ऐसे लोग साथ होते है और एक छूरा भोंकता है, दूसरा दवा करता है और तीसरा सहानुभूति देता है. भाजपा की टोली के बारे में देश को अब ज्ञान होने लगा है. लोकतंत्र की लड़ाई में ये लोग धनबल से लड़ना चाहते है, जिसका जवाब जनबल देगा.





