
रांची : झारखंड के डीजीपी नीरज सिन्हा ने दो दिनों में दो ईनामी नक्सलियों के मार गिराये जाने के बाद अपनी आला अधिकारियों की टीम के साथ पुलिस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. इस दौरान नक्सलियों के पास से बरामद हथियार को मीडिया के सामने लाया गया. इस दौरान डीजीपी के साथ एडीजी संजय आनंद लाठकर, अमोल वी होमकर समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे. इस दौरान डीजीपी नीरज सिन्हा ने कहा कि चाईबासा और गुमला में दो दिनों में दो ईनामी नक्सलियों को मार गिराया गया है. इन दोनों नक्सलियों को लेकर पहले तो बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन जब पुलिस पर ही हमला किया गया तो पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की गयी और उनको मार गिराया गया. उन्होंने कहा कि ईनामी नक्सलियों को इनकाउंटर में मारने वाली पूरी टीम के बीच ईनाम की राशि वितरित की जायेगी. इसके अलावा सबको प्रशस्ति पत्र भी दिया जायेगा. डीजीपी ने कहा कि ये दोनों इनकाउंटर शानदार है. 15 से 20 साल में सबसे अच्छा इनकाउंटर बुद्धेश्वर का रहा. बुद्धेश्वर द्वारा लगातार हमला पुलिस पर किया जा रहा था जबकि कई सिविलियन की भी मौत हो चुकी थी. लगातार लैंडमाइंस लगाया गया था, जिस कारण उनकी मौत होने से लोगों ने राहत की सांस ली है. उन्होंने कहा कि नक्सली मारने का प्रयास करते है और हम लोग बचाने का प्रयास करते है. उन्होंने कहा कि नक्सलियों के पास से बरामद हथियार कहां से आये है और पुलिस के तो नहीं है, ये पता किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नक्सलियों की कमी हुई है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल कर वे लोग कम मैनपावर में ज्यादा नुकसान पहुंचा पा रहे है. हम लोग कोशिश कर रहे है कि उनके सारे प्रयासों को विफल करें. उन्होंने कहा कि जो नक्सली है, वे सरेंडर पॉलिसी का लाभ लें. काफी सुविधाएं है और काफी उदार नीति है, जिसका लाभ लेने की जरूरत है. इनकाउंटर आमने सामने की लड़ाई है, लेकिन पुलिस का यह कोशिश है कि नक्सली सरेंडर करें. उन्होंने कहा कि झारखंड की नेचुरल और माइनिंग ब्यूटी कहीं नहीं है और लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे है. टूरिस्ट नहीं आ पाते है और निवेश नहीं हो पाता है. सारे लोग मिलकर बेहतर झारखंड बनाये. उन्होंने नशाखोरी के बारे में पूछे गये सवाल पर कहा कि इसके लिए अलग से अभियान चलाया जा रहा है. अफीम और ड्रग्स का कारोबार प्रतिबंधित गिरोह फंड को चैनल बनाने के लिए करते है. उसको लेकर कार्रवाई की जा रही है. इंटीलिजेंस काफी बेहतर से किया गया. डीजीपी ने कहा कि सरेंडर पॉलिसी झारखंड का काफी अच्छा है और इसका लाभ उठाते हुए नक्सलियों को सरेंडर कर देना चाहिए. अगर इस तरह की कार्रवाई की गयी तो पुलिस उनको किसी भी हाल में नहीं छोड़ने वाली है और करारा जवाब दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि नक्सलियों के साथ हुई वारदात में पुलिस को भी नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन पुलिस का मनोबल काफी ऊंचा है और निश्चित तौर पर इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी. उन्होंने बताया कि जमीन को लेकर होने वाले विवाद और हत्याओं को गंभीरता से लिया जायेगा और इस तरह के माफिया को कभी नहीं बख्शा जायेगा.







