रांची / जमशेदपुर : किसी कार्यक्रम को लेकर सरकारी स्कूलों की दीवारों पर पेंट से जागरूकता संदेश लिख देने से स्कूल की शक्ल ही बदल जाती है. स्कूल को जितना ही स्वच्छ रखने का प्रयास किया जाता है, उसकी शक्ल उतनी ही भद्दी नजर आती है. सरकारी स्कूलों की इस स्थिति पर पर शिक्षा विभाग ने चिंता जतायी है. साथ ही पेंट से लिखवाने के बजाय अब वैकल्पिक तरीका अपनाने को कहा है. दरअसल, राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव के रवि कुमार ने राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग को पत्र लिख कर अवगत कराया है. उन्होंने पेंट के बजाय फ्लैक्स का उपयोग करने का आग्रह किया है. (नीचे भी पढ़ें)

क्या है पत्र में
पत्र में कहा गया है कि झारखण्ड राज्य में स्वास्थ्य संबंधित विभिन्न जागरूकता संदेशों को विद्यार्थियों एवं जन मानस की जागरूकता के लिए विद्यालय भवनों पर अंकित कराया जाता है. सूचनाएँ विद्यालय भवनों पर पेंट से अंकित करा दी जाती हैं, जो किसी अभियान या कार्यक्रम के संपन्न होने के बाद भी यथास्थिति विद्यालय भवन पर अंकित रहती हैं. पुनः अगले अभियान / कार्यक्रम के दौरान फिर से सूचनाएं अद्यतन कर दी जाती हैं. कहा गया है कि शिक्षा विभाग द्वारा सभी विद्यालय भवनों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रयास किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को एक स्वच्छ वातावरण में शिक्षा प्रदान की जा सके. स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सूचनाओं को दीवारों पर पेंट से अंकित कर दिए जाने के कारण कार्यक्रम या अभियान की समाप्ति के उपरान्त भी अनावश्यक रूप से यह सूचनाएं अंकित रह जा रही हैं. इससे विद्यालय परिसर पर रंगरोगन खराब हो रहा है. साथ ही कार्यक्रम या अभियान के समापन के उपरान्त सूचनाएं उपयोगी भी नहीं रहती हैं. (नीचे भी पढ़ें)
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव के रवि कुमार ने कहा है कि इस विभाग के लिए अल्प अवधि के उपरान्त विद्यालय की दीवारों या भवनों का पुनः रंगरोगन कराया जाना संभव नहीं है. इसमें अनावश्यक रूप से राशि का व्यय भी संभावित है. विद्यार्थियों को एक स्वच्छ वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराना हम सभी का दायित्व है. एवं इसमें स्वास्थ्य विभाग का भी पूर्ण सहयोग आवश्यक है. अतः भविष्य में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जाने वाले कार्यक्रम या अभियान के संबंध में जागरूकता संदेश विद्यालय की दीवारों पर पेंट से अंकित करने के स्थान पर फ्लैक्स या इसी प्रकार की किसी अन्य सामग्री पर अंकित करते हुए इसे निर्धारित स्थलों पर लगवाया जाये. साथ ही कार्यक्रम या अभियान के समापन के बाद पुनः उसे दीवारों से हटा दिया जाये.




