
रांची : झारखंड की हेमंत सोरेन की सरकार वर्ष 2021 को नियोक्ता वर्ष घोषित किया है. इसके तहत लोगों को नौकरी दी जानी है, लेकिन इसके ठीक विपरित लोगों की नौकरियां छीनी जा रही है. हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने वर्ष 2018-19 में नियुक्ति के लिए निकाले गये छह नियुक्ति परीक्षा के विज्ञापन को सोमवार को रद्द कर दिया. इनमें से तीन विज्ञापन वर्ष 2018 और तीन विज्ञापन 2019 के हैं. जेएसएससी द्वारा समूह ग, समूह घ और समूह ख के तहत ली गई इन छह नियुक्ति परीक्षाओं के रिजल्ट और नौकरी की आस लगाये युवाओं के लिए यह खबर कियी वज्रपात से कम नहीं है. जेएसएससी की ओर से अभी केवल विज्ञापन रद्द किये जाने की सूचना जारी की गयी है. आगे इन सभी पदों पर नियुक्ति के लिए फिर से आवेदन मंगाये जायेंगे या नहीं, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गयी है. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि इन नियुक्ति के लिए ली गयी परीक्षाओं में अब तक नियुक्ति पत्र निर्गत नहीं किया गया है. ये सभी परीक्षाएं संशोधित नियमावली के दायरे में आती है. इस कारण इनको रद्द किया जा रहा है. जेएसससी की इस कार्रवाई से इन परीक्षाओं में शामिल परीक्षार्थियों में निराशा और गम का माहौल है. छात्र संगठनों का कहना है कि राज्य की नयी सरकार युवाओं को नौकरी देने का वायदा कर सत्ता में पहुंची है और सरकार के पदाधिकारी नौकरी देने के बदले पहले से निकले विज्ञापन को भी रद्द कर सरकार की छवि को धूमिल करने में लगे हैं. (नीचे पूरी खबर पढ़े)

विधानसभा के बाहर धरना पर बैठे 80 अस्थायी कर्मचारी
झारखंड विधानसभा के बाहर सोमवार की शाम को विधानसभा के गेट पर धरना पर बैठ गये. विधानसभा की ओर से 80 अस्थायी कर्मचारियों को हटा दिया गया है. बताया जाता है कि उनको बिना किसी सूचना के हटा दिये गये जबकि उनको स्थायी तौर पर बहाल करने का आदेश दिया गया था. यह परिस्थिति तब है, जब सरकार नौकरियां देना चाहती है. वहीं, नौकरी वर्ष के बीच हंगामा भी हो रहा है. रांची के मोरहाबादी मैदान में धरना पर बैटे आरक्षी संवर्ग के लोगों का आंदोलन भी अभी समाप्त नहीं हुआ है. वहीं, पारा शिक्षक आंदोलित है जबकि पारा चिकित्सक और पारा स्वास्थ्य कर्मी भी हंगामा कर रहे है.





