
गोड्डा : झारखंड में शराब की नयी नीति को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और शिक्षा सह आबकारी मंत्री जगरनाथ महतो आगे कदम बढ़ा रहे है, लेकिन उनकी ही पार्टी में घमासान छिड़ गया है. नयी शराब नीति का विरोध झामुमो के कद्दावर नेता और बोरियो से झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने किया है. लोबिन हेम्ब्रम ने गोड्डा में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर अपनी भड़ास अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ निकाली है. उन्होंने हेमंत सोरेन और उनकी सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा दिया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि झारखंड में शराब का सरकारीकरण दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सिद्धांतों के खिलाफ है. लोबिन हेंब्रम ने एक सवाल के जवाब में कहा कि शिबू सोरेन उनके नेता हैं. हेमंत सोरेन उनके नेता नहीं हो सकते. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सदन के नेता हो सकते हैं मेरे नहीं. लोबिन हेंब्रम ने कहा कि शिबू सोरेन राज्य में शराबबंदी के समर्थक रहे हैं. उन्होंने शुरआत से ही आदिवासी समाज को शराब से दूर रहने की नसीहत दी है. दिशोम गुरु आज भी युवा पीढ़ी से शराब से दूर रहने की अपील सभा और बैठकों में करते हैं. पूर्व मंत्री और वर्तमान झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि शिबू सोरेन ना केवल झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हैं बल्कि आदिवासी समाज के मान तथा सम्मान के प्रतीक भी हैं. शिबू सोरेन के जीवन मूल्यों और सिद्धातों से समझौता उनका अपमान माना जायेगा. लोबिन हेंब्रम ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि आदिवासी समाज शिबू सोरेन का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा. लोबिन हेम्ब्रम यहीं नहीं रुके. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे इस मामले को सदन में उठाया. उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शराब का सरकारीकरण नहीं करने और दिशोम गुरू के सिद्धांतो के अनुरूप राज्य में शराब नीति बनाने का आग्रह किया था. उन्होंने पार्टी के सभी विधायकों को भी पत्र लिखा था. उनसे आग्रह किया था कि शिबू सोरेन के सम्मान की रक्षा का हर संभव प्रयास किया जाए. लोबिन हेंब्रम ने कहा कि उन्होंने विधायकों से राजस्व की दुहाई देकर दिशोम गुरु के सिद्धांतों के खिलाफ जाने के प्रयास को रोकने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व बढ़ाना चाहती है, वह करना चाहिए, लेकिन इसका तरीका कुछ भी गलत नहीं अपनाया जा सकता है. प्रेस वार्ता में काफी आक्रामक नजर आ रहे लोबिन हेंब्रम ने कहा कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी उन्होंने सदन में मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि राज्य में शराबबंदी हो या ऐसी शराब नीति बने जोकि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सिद्धांतों के अनुरूप हो. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लोबिन ने याद दिलायी और कहा कि मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार ने राज्य में शराब से होने वाले राजस्व में बढ़ोतरी का उपाय सुझाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड को परामर्शी नियुक्त किया है. सीएसएमएल द्वारा झारखंड में शराब के सरकारीकरण का परामर्श दिया है. उन्होंने कहा कि झारखंड में ऐसा प्रयोग बीजेपी के रघुवर दास कार्यकाल में भी हो चुका है, तब झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसका जोरदार विरोध किया था. विधायक ने कहा कि झामुमो के विरोध के कारण ही सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा था. उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के विरोध का सबसे बड़ा कारण था शराब का सरकारीकरण दिशोम गुरु शिबू सोरेन की शिक्षा और सिद्धांतों के खिलाफ होना. उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन मूल्यों, शिक्षा और नीति के खिलाफ हमारी सरकार यदि शराब के सरकारीकरण का फैसला करती है तो ये सिर्फ शिबू सोरेन ही नहीं बल्कि आदिवासी समाज का अपमान होगा.



