
रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) लगभग तय कर ली है कि राष्ट्रपति चुनाव में वे लोग पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को ही समर्थन करेगी. इसको लेकर एक बीच का रास्ता झामुमो अपनाने जा रही है कि विधायकों और सांसदों को जो अच्छा लगता है, वह करें, अपनी मर्जी और दिल की बातों को सुनकर मतदान करें. इसके लिए झामुमो कोई व्हिप जारी नहीं करने वाली है. वैसे अंदरखाने यह बातें है कि कांग्रेस के साथ चूंकि सरकार हेमंत सोरेन की चल रही है, इस कारण वे रिस्क लेने की स्थिति में नहीं है और कांग्रेस को भी नाराज नहीं करना चाहती है. झामुमो चूंकि आदिवासी समुदाय का वोट लेती है, इस कारण आदिवासियों को साथ लेकर चलने का पिक्चर बनाना चाहती है और आदिवासी को पहली बार राष्ट्रपति बनाये जाने का समर्थन भी करना चाहती है. ऐसे में विधायकों और सांसदों को झामुमो के आलाकमान ने गुपचुप तरीके से कह दिया है कि राष्ट्रपति चुनाव में वे लोग अपनी मर्जी से जाकर द्रौपदी मुर्मू को ही वोट करें, लेकिन इसको लेकर लिखित तौर पर कोई आदेश जारी नहीं होगा, ना ही कोई व्हिप ही जारी की जायेगी. आपको बता दें कि पिछले दिनों ही राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की थी और मुलाकात भी की थी. इसके बाद वे द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरा के पहले उनका ट्विटर पर स्वागत भी किया था, जिसके बाद इशारा लगभग साफ कर दिया गया था. इसके बाद द्रौपदी मुर्मू शाम 4.30 बजे दिल्ली वापसी की जगह उसको विलंब कर दी और केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा की पहल पर वे सीधे झामुमो सुप्रीमो गुरूजी शिबू सोरेन से मिलने पहुंच गये. उस वक्त गुरुजी शिबू सोरेन भी साथ थे. वैसे भी हाल के दिनों में अचानक से भाजपा से झामुमो की नजदीकियां बढ़ती जा रही है. आजसू के साथ भी बेहतर तालमेल हो रहा है. झामुमो से कभी विधायक रहे अर्जुन मुंडा बीच में झामुमो और भाजपा के बीच के सेतु का काम कर रही है. अब राष्ट्रपति चुनाव के बाद यह कयास लगाये जा रहे है कि कोई अंदरखाने गेम हो जायेगा और फिर झामुमो और भाजपा एक साथ सरकार बना भी सकती है. वैसे झामुमो के पास सिर्फ एक ही सांसद है. वैसे विधायकों का समर्थन की जरूरत होगी. इसको लेकर अभी काफी कुछ होना बाकि है. राष्ट्रपति चुनाव तक तो नयी चीजें दिखेगी और राष्ट्रपति चुनाव के बाद तक की स्थिति का आकलन करने की जरूरत है. राजनीतिक जानकारों का यह कहना है कि आने वाले दिनों में हालात बदलेंगे और झारखंड की राजनीति नयी करवट ले सकती है.






