
जमशेदपुर : जमशेदपुर के निर्मल गेस्ट हाऊस में झारखंड पीपुल्स पार्टी (झापीपा) का 31वां स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य अतिथि के तौ रपर झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाजपा के पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो मौजदू थे जबकि इसकी अध्यक्षता रामगढ़ के पूर्व विधायक अर्जुन राम महतो ने किया था. इसके अलावा झामुमो उलगुलान धनबाद के केंद्रीय महासचिव बेनीलाल महतो, केंद्रीय सचिव दिगंबर महतो, झापीपा के केंद्रीय सचिव उमानाथ गोल, झारखंड आंदोलनकारी मोहम्मद मुश्ताक अहमद मौजूद थे. झापीपा के संस्थापक सह पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने पूरे कार्यक्रम का संचालन भी किया. (नीचे देखे पूरी खबर)

130वें स्थापना दिवस समारोह पर झामुमो, राजद और कांग्रेस के संयुक्त सरकार के दो साल के कामकाज पर विस्तार से चर्चा की गयी. इस दौरान यह कहा गया कि हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री रहते हुए झारखंड विरोझी नीति निर्धारण के लिए और बाहरी लोगों को प्रश्रय देने साथ ही हाल ही में भोजपुरी, बिहारी, अंगिका, मगही भाषाओं को क्षेत्रीय भाषाओं के रुप में मान्यता प्रदान करने की आलोचना की गयी. मांग की गयी कि अविलंब बाहरी भाषाओं की मान्यता को रद्द करते हुए संथाली, मुंडारी, हो, कुरुक, खड़िया, खोरठा, नागपुरी, कुरमाली, पंचपरगनिया जैसे झारखंड भाषा को उच्च स्तर तक स्कूलों और कॉलेजों के लिए अविलंब स्वीकृति दी जाये. बतौर मुख्य अतिथि शैलेंद्र महतो ने कहा कि भोजपुरी मगही, अंगिका जैसी भाषाओं की मान्यता रद्द करने और 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति का निर्धारण करने की मांग पर 4 फरवरी 2022 को संपूर्ण झारखंड बंद किया जायेगा. पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने कहा है कि 1 जनवरी 2022 से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गद्दी छोड़ो और झारखंड मुक्ति मोर्चा चुप्पी तोड़ो यह अभियान चालू किया जाएगा. श्री बेसरा ने कहा है झारखंड के निर्वाचित प्रतिनिधि नायक नहीं बन के नालायक साबित हुए हैं. इसलिए उन्हें वापस बुलाना चाहिए यानी उन्हें अपने विधायक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सदस्यों में से एक रामगढ़ के पूर्व विधायक अर्जुन राम महतो ने कहा है कि शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन बाप-बेटा मिलकर झारखंड की बागडोर अपने हाथों में लिया और अभी बाहरी लोगों के चंगुल में फंस गए हैं. वे दोनों ही शहीदों की अरमान और झारखंडी आकांक्षाओं को भूल गए हैं. झारखंड में तीसरा राजनीतिक विकल्प बनना जरूरी है और झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार को उखाड़ फेंकना है. कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन झारखंड पीपुल्स पार्टी के केंद्रीय सचिव उमानाथ कोल ने दिया.




