रांची: झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा द्वारा गुरुवार को रांची के सर्कुलर रोड़ स्थित होटल अप्सरा के सभागार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया. केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहु ने कहा कि-पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर अपना वैश्य एवं ओबीसी विरोधी चेहरा दिखा दिया है. उन्होंने कल रांची में पत्रकारों को वैश्य समाज से आने वाले तेज-तर्रार, ईमानदार आईपीएस अधिकारी और झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता के खिलाफ अनर्गल बयान देकर यह साबित कर दिया है कि वे वैश्य समाज को अपनी वर्तमान पार्टी से दूर करके ही मानेंगे. चूंकि अब बाबूलाल मरांडी अपने समाज के नेता तो रहे नहीं, पिछले दो चुनाव-लोकसभा एवं विधानसभा में यह साबित हो चुका है. तो अन्य वर्ग को भी उलूल-जलूल बयान देकर नाराज कर रहें हैं, ताकि वे चर्चा में बने रहें. लेकिन बाबूलाल यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वे अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मार रहे हैं. अभी वे जिस सीट राज धनवार से जीत कर आयें हैं, इसी वैश्य और ओबीसी समाज के वोट पाने से वे विधायक बन सके हैं वे जान लें.(नीचे भी पढ़े)
बाबूलाल मरांडी ने विभिन्न कथित संदर्भों के जरिए डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को गलत बताया है और राज्य सरकार पर सवाल खड़ा किया है. लेकिन उन्हें उत्तर प्रदेश के सरकारी गजट (8 नवंबर 2024 को जारी) को भी पढ़ लेना चाहिए. क्या वे यही सवाल उत्तर प्रदेश सरकार से करने की हिम्मत रखते हैं? उत्तर प्रदेश एवं अन्य कई राज्यों में यही व्यवस्था की गयी है तो झारखंड में अनुराग गुप्ता को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है, इसलिए कि वे वैश्य समाज से आते हैं.देखा जाए तो बाबूलाल मरांडी हमेशा से वैश्य एवं ओबीसी विरोधी रहें हैं. जब सन् 2000 में अलग राज्य बनने के बाद प्रथम मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने ही ओबीसी का आरक्षण 27 फीसदी से घटाकर 14 फीसदी कर दिया था. जिसका खामियाजा आज भी ओबीसी वर्ग को भुगतना पड़ रहा है. हर सरकारी बहाली में ओबीसी को 13 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ रहा है. विगत 24 वर्षों में कई लाख ओबीसी समाज की नौकरी को अन्य के खाते में डाल दिया है.(नीचे भी पढ़े)
बाबूलाल मरांडी का वैश्य ओबीसी विरोधी चेहरा तो इसी से साबित हो जाता है कि वे अपने वर्तमान दल के सबसे कद्दावर नेता एवं पूरे पांच साल तक सरकार चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को झारखंड की राजनीति से दूर करने के लिए हर उपाय करते रहे हैं. भाजपा में शामिल हुए झारखंड के अगुआ आंदोलनकारी सूरज मंडल को हाशिए पर रखा है.वैश्य मोर्चा उन्हें चुनौती देती है कि बाबूलाल मरांडी को खुद के बड़े नेता होने और जनाधार का इतना ही गुमान है तो तत्काल विधायक पद से इस्तीफा देकर दुबारा चुनाव लड़ना और जीत कर दिखाना चाहिए, उन्हें पता चल जायेगा कि वे कितने लोकप्रिय हैं.बाबूलाल अपने दिए गए बयान को जल्द वापस नहीं लेते हैं तो झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा सड़कों पर उतर कर विरोध जतायेगी. श्री मरांडी कैसे-कैसे लोगों को संरक्षण दे रहे हैं, इसका खुलासा किया जायेगा. उन्हें यह पता होना चाहिए कि शीशे के घर में रहने वाले दूसरों के घरों में पत्थर नहीं मारते हैं.इस प्रेस कांफ्रेंस में वैश्य मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हीरानाथ साहु, वरीय उपाध्यक्ष अश्विनी कुमार साहु, सुरेश साहु, उप प्रधान महासचिव उपेन्द्र प्रसाद, केंद्रीय महासचिव कपिल साहु, संगठन महासचिव कृष्णा साहु, अनिल वैश्य, केंद्रीय सचिव राजेन्द्र साहु, केंद्रीय सदस्य मुकेशलाल सिंदूरिया, संजय साहु, महिला मोर्चा अध्यक्ष रेणू देवी, युवा मोर्चा के अध्यक्ष हलधर साहु, छात्र मोर्चा अध्यक्ष युवराज साहु, कुमार चाणक्य आदि उपस्थित थे.



