
जमशेदपुर : झारखण्ड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में गरीब किसानों तथा जमाकर्ताओं के पैसे की लूट मची हुई है। बैंक में चल रही लूट की तरफ से सहकारिता विभाग ने भी आंखें मूंद रखा है। जानकारी के अनुसार बैंक में व्याप्त लूट एवं भ्रष्टाचार से परेशान होकर चार निदेशकों बास्को बेसरा, प्रभात कुमार सिंह, सुनयना पाठक तथा कौशिल्य कुजूर के इस्तीफे के बाद निदेशक मंडल स्वतः अल्पमत में आकर मृत हो चुका है। इसके बावजूद करोड़ों करोड़ के नाजायज भुगतान मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी तथा सात क्षेत्रीय प्रबंधकों की गलत नियुक्ति एवं हर सप्ताह 15-20 कर्मचारियों का तबादला एवं पदस्थापना कर नाजायज वसूली की जा रही है। 12 मार्च 2020 को अध्यक्ष अभय कान्त प्रसाद तथा एक निदेशक शम्भुचरण कर्मकार के आदेश पर महाप्रबंधक ने 3 करोड़ 76 लाख का बोगस भुगतान डाटा सेन्टर के नाम पर कर दिया, जबकि डाटा सेन्टर बनाने का निर्णय कभी बैंक ने लिया ही नहीं। डाटा सेन्टर के नाम पर अब तक 10 करोड़ का अवैध भुगतान हो चुका है। सरकार के अधिसूचना के अनुसार चयन समिति का गठन किये बिना लगातार नाजायज नियुक्तियां की जा रही है। बैंक में दस ड्राईवर रहते हुए नाजायज तरीके से छः ड्राईवर अध्यक्ष ऩे बहाल कर लिया है। गलत तरीके से नियुक्त सी.ई.ओ. तथा क्षेत्रीय प्रबंधक बोर्ड की स्वीकृति के बिना ही धड़ल्ले से आदेश निकाल रहे हैं तथा बैंक के पैसों की बंदरबांट कर रहे हैं। बिना जरूरत करोड़ों की मशीनें खरीदकर बैंक में डम्प कर दिया गया है। बैंक के निर्वाचित प्रतिनिधि तथा सहकारिता अध्ययन मंडल के अध्यक्ष बिजय कुमार सिंह लगातार विभागीय अधिकारियों, रिजर्व बैंक तथा नाबार्ड को इन गड़बड़ियों की शिकायतें भेज रहे हैं पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, रजिस्ट्रार तथा अन्य विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का राजनैतिक दबाव बनाया जा रहा है।




