
जमशेदपुर : झारखंड की सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) बुधवार को टाटा समूह की कंपनियों का घेराव करने के बाद एक बार फिर से आंदोलन को और तेज करने जा रही है. इसको लेकर गुरुवार को आहूत एक बैठक में तय किया गया कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे लोग 20 दिनों के बाद फिर से पूरे कोल्हान में आर्थिक नाकेबंदी कर देंगे. इसको लेकर जमशेदपुर के निर्मल गेस्ट हाऊस में महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें टाटा से जुड़ी हुई कंपनियों के घेराव की समीक्षा की गयी.इस बैठक में मंत्री चंपई सोरेन को भी बुलाया गया था, जिनको राज्य सरकार के नाम एक मांग पत्र भी सौंपा गया. बैठक में जमशेदपुर के जिला अध्यक्ष सह घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन, पोटका के झामुमो विधायक संजीव सरदार, ईंचागढ़ की विधायक सविता महतो, खरसावां के झामुमो विधायक दशरथ गगराई, निरेल पूर्ति समेत अन्य लोग मौजूद थे. (नीचे पूरी खबर देखें और देखे चंपई सोरेन का बयान-video)
झामुमो की दलील है कि अगर टाटा कमिंस या कोई कंपनी का दफ्तर महाराष्ट्र शिफ्ट हो जायेगा तो महाराष्ट्र के कानून के अंतर्गत कंपनियां चलेगी जबकि झारखंड में कंपनी का उत्पादन सेंटर होगा और महाराष्ट्र का कानून चलेगा तो यह मुश्किल वाली बात होगी. यहां के छोटे से छोटे मामले मुंबई हाईकोर्ट में लड़े जायेंगे. इसमें तय किया गया कि अगर 20 दिनों में कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो वे लोग आर्थिक नाकेबंदी कर देंगे. कोल्हान का आर्थिक नाकेबंदी की जायेगी, जिसमें किसी भी गाड़ियों को आने जाने नहीं दिया जायेगा. इस मसले को लेकर कोल्हान के सारे विधायक और नेतागण राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मिलकर स्थिति से सबको अवगत करायेंगे. इन लोगों का आरोप है कि टाटा स्टील और टाटा से जुड़ी कंपनियां सौ साल से यहां बसी है, लेकिन यहां के मूलवासियों को कोई हक नहीं दिया है. विस्थापितों को भी नौकरी नहीं दी गयी है. इस कारण अब वे लोग इसकी लड़ाई लड़ेंगे और किसी भी हद तक जायेंगे.






