सुगम कुमार सिंह/जमशेदपुर : मनुष्य या जानवरों में भी जितनी बीमारियां पाई जाती हैं, प्रकृति में उनके कई-कई उपचार भी उपलब्ध हैं. जरूरत है तो बस उन्हें पहचानने की. ऐसी ही एक बीमारी है रक्ताल्पता या हीमोग्लोबिन की कमी, जिसके शिकार लोगों की कमी नहीं. महिलाओं में तो यह बीमारी आम है. लेकिन कुदरत ने इसके उपचार के लिए अचूक औषधियां भी दे रखी हैं. (नीचे भी पढ़ें)

ऐसी ही एक अचूक औषधि है एक कांटेदार पौधा, जिसे स्थानीय आदिवासी समुदाय कुलेखारा या डांगरा कांटा के नाम से जानता है. जनजातीय परिवारों में इसको साग के रूप में खूब खाया जाता है. लगभग पूरे विश्व में पाये जाने वाले हाइग्रोफिला औरिकुलता वैज्ञानिक नाम वाले इस पौधे को कोकिलाक्षा, ब्रानोलिया प्लांट, गोकुलाकांता, गो-कांता, कोकिलाक्षा, निर्मुली आदि नामों से भी जाना जाता है.यह अक्सर भीगे रहनेवाले क्षेत्रों में स्वतः ही पनपता है. झारखंड क्षेत्र के जनजातीय इलाकों में इसे बड़ा चाव से खाया जाता है. प्राचीन काल से इसका सेवन करने वाले जनजातीय लोगों को शायद इसका पता भी न हो, किन्तु वे अनजाने में ही इससे अपने रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी दूर करते आ रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)

हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक तरह का प्रोटीन है. गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में हीमोग्लोबिन की कमी होने का खतरा अधिक होता है. महिलाओं में एनीमिया की शिकायत भी आम है. शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी जानलेवा भी हो जाती है. झारखंड के संथाल समुदाय के लोग हीमोग्लोबिन की कमी दूर करने के लिए कुलेखारा या डांगरा कांटा साग का सेवन करते हैं. आदिवासी महिलाएं इसे एकत्र कर साग के रूप में पकाती हैं. इसके अलावा कुलेखारा के जूस के सेवन से भी एनीमिया में काफी लाभ होता है. क्षेत्र की महिलाएं कुलेखारा का ज्यादा सेवन करती हैं एवं क्षेत्र के हाट बाजारों में इसकी बिक्री भी होती है. झारखंड के साथ ही बंगाल, ओड़िशा, छत्तीसगढ़ के कई जनजातीय समुदायों में भी डांगर साग खाया जाता है. (नीचे भी पढ़ें)

अपने औषधीय गुणों के कारण यह सेहत को दुरुस्त रखने में बहुत प्रभावी माना जाता है. बता दें कि हीमोग्लोबिन की कमी से एनीमिया, शरीर में सूजन, डिप्रेशन, रक्तचाप, कमजोरी या थकान, सिर चकराना, सिरदर्द और हाथ-पांव का ठंडा हो जाना जैसी समस्याएं होने की आशंका रहती है. कुलेखारा के सेवन से इन रोगों का प्रभाव कम किया जा सकता है. (नीचे भी पढ़ें)
कुलेखारा या डांगरा कांटा साग को मेडिसिनल प्लांट के रूप में भी जाना जाता है. इसकी उपयोगिता इसी बात से समझी जा सकती है कि कई ऑनलाइन शांपिग प्लेटफॉर्मों पर भी इसकी बिक्री हो रही है. हाइग्रोफिला ऑरिकुलता के बीज, जड़ों, फूल, फल एवं पत्तियों सभी के इस्तेमाल का वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है.



