
जमशेदपुर : केंद्रीय श्रमिक संगठनों व स्वतंत्र ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर गुरुवार को देशव्यापी बंद जमशेदपुर व आसपास के हिस्सों में असरदार रहा. बैंक, एलआईसी ऑफिस, पोस्टऑफिस समेत अन्य प्रतिष्ठान बंद रहे. वहां कर्मचारी व श्रमिक धरना बैठे रहे और केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध व अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाये. हड़ताल के कारण शहर में करोड़ों का टर्नओवर प्रभावित रहा. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)
सिदगोड़ा मैदान में सिंहभूम असंगठित कामगार यूनियन व इंटक के बैनर तले श्रमिकों व संगठन कार्यकर्ताओं धरना-प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने यूनियन के जिलाध्यक्ष विजय खां ने केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी बताते हुए इसे अविलंब वापस लेने की मांग की. हड़ताल व धरना में संगठन के कई कार्यकर्ता व श्रमिक शामिल हुए. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)
हड़ताल के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा में कर्मचारियों ने डीजीएम को अंदर जाने से रोक दिया. जानकारी के अनुसार कर्मचारी बैंक के बाहर हड़ताल पर बैठे हुए थे, उसी दौरान डीजीएम बैंक के अंदर प्रवेश करना चाहते थे. उनका कहना था कि वह हड़ताल का हिस्सा नहीं हैं. वह गेट के समक्ष पहुंच गये थे. इसी बीच गेट के समक्ष बैठे कर्मचारियों ने रोक दिया. कर्मचारियों का कहना था कि उनके संगठन की ओर से यह कहा गया है कि उनकी हड़ताल को नैतिक समर्थन मिलेगा. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)
ऑल इंडिया इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे. इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए नारेबाजी भी की. एसोसिएशन के अनुसार इस हड़ताल में देश भर में करीब 20 करोड़ श्रमिकों के शामिल होने का अनुमान है. केंद्र सरकार की नीतियों के कारण पिछले 45 वर्षों के दौरान वर्तमान में बेरोजगारी सबसे खराब स्तर पर है. कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी दिये बगैर सरकार ने तीन कृषि बिलों को पास कर दिया. सके द्वारा सरकार ने अनुबंधद खेती देशी औ्र विदेशी खुदरा अकाधिकार को बढ़ावा देकर देश की खाद्य सुरक्षा को संकट में डाल दिया है. इसके अलावा हड़ताली कर्मचारियों ने कोविड-19 के अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं को लाल व बीमा लाभ नहीं दिये जाने, श्रम नीति में परिवर्तन आदि पर भी चर्चा करते हुए विरोध जताया. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)

दूसरी ओर बीमा कर्मचारी संघ जमशेदपुर मंडल एवं जमशेदपुर डिवीजन इंशंयोरेंस इंप्लाइज एसोसिएशन के नेतृत्व में एलआईसी जमशेदपुर मंडल अंतर्गत मंडल कार्यालय समेत तमाम शाखा कार्यालय के बीमाकर्मी हड़ताल में शामिल हुए. उन्होंने श्रम कानूनों संशोधन किये जाने एवं किसान व विपक्ष के विरोध के बावजूद कृषि विधेयक पारित किया जाने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों में संशोधन किये जाने से श्रमिकों का बड़ा वर्ग कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर होकर पूंजीपतियों की हाथों की कठपुतली बन जायेगा. इसके मद्देनजर उन्होंने तमाम मजदूर विरोधि श्रमिक संशोधनों को तत्काल रद्द करने की मांग की. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)
हड़ताल में शामिल एसयूसीआई ने धरना दिया और केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी, किसान विरोधी व मजदूर विरोधी बताते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. इस दौरान एसयूसीआई ने श्रम कानून में संशोधन, किसान विधेयक आदि को लेकर भारत राजपत्र पर भी सवाल उठाये. साथ ही भारत राजपत्र की प्रति जला कर कर अपना विरोध दर्ज कराया. साथ ही श्रम कानून में संशोधन, किसान विधेयक को वापस लेने की मांग की. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)

वहीं ऑल इंडिया पोस्टल इंप्लाइज यूनियन ग्रुप सी (एनएफपीई) के बैनर तले पोस्ट ऑफिस के डाकिया व अन्य कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए. इस दौरान पोस्टऑफिस बंद रहे व कामकाज ठप रहा. कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में नारे भी लगाये. उन्होंने श्रम कानून में संशोधन आदि का विरोध किया.

इधर जुस्को श्रमिक यूनियन एवं आम मजदूर यूनियन के बैनर तले अनेक कर्मचारी व श्रमिक हड़ताल में शामिल हुए. यूनियन के अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय के नेतृत्व में जुस्को श्रमिक यूनियन के कार्यालय से जुलूस निकाला गया, जो बिष्टुपुर स्थित पोस्टल पार्क पहुंचा. वहां मौन प्रदर्शन व हाथों में तख्तियां लेकर यूनियन की ओर से अपनी मांगों को रखा गया, साथ ही केंद्र सरकार की नीतियों के प्रति विरोध जताया गया. इस दौरान यूथ इंटक के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश पांडेय, टाटा वर्कर्स यूनियन के सहायक सचिव धर्मेंद्र उपाध्याय समेत अन्य उपस्थित थे.





