नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली स्थित सेना के मुख्यालय में तैनात एक लेफ्टिनेंट कर्नल पर पाक खुफिया एजेंटों से संपर्क रखने एवं मोबाइल में प्रतिबंधित ऐप रखने के आरोप में कोर्ट मार्शल की कार्रवाई चल रही है. उक्त सैन्य अधिकारी के खिलाफ कुल नौ आरोप लगाए गए हैं. सेना मुख्यालय में तैनात उक्त अधिकारी स्टाफ ड्यूटीज (एसडी) निदेशालय में तैनात है और फिलहाल 226 कंपनी आर्मी कॉर्प्स (सप्लाइ) टाइप ‘जी’ से संबद्ध है. अधिकारी के खिलाफ लगे आरोप उस समय से संबंधित हैं जब वह सेना मुख्यालय के एसडी निदेशालय में जनरल स्टाफ ऑफिसर-1 के रूप में पदस्थापित था. (नीचे भी पढ़ें)
संबंधित सैन्य अधिकारी के खिलाफ लगे पहले तीन आरोप आर्मी एक्ट की धारा 45 के तहत लगाए गए हैं. यह धारा किसी अधिकारी के ऐसे आचरण से जुड़ी है जो उसके पद के अनुरूप नहीं माना जाता. आरोप है कि 24 दिसंबर 2019 से 16 सितंबर 2022 के बीच उक्त अधिकारी दो ऐसे मोबाइल नंबरों से संपर्क में था जिन्हें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से जुड़े संदिग्ध नंबर बताया गया है. इसके अलावा वह +92 से आरंभ होनेवाले पाकिस्तान के 10 नंबरों के संपर्क में भी था. उक्त अधिकारी पर जनवरी 2020 से लेकर अगस्त 2022 के बीच ‘अनातोली’ नाम के एक विदेशी नागरिक से बिना अनुमति संपर्क रखने का भी आरोप है. हालांकि आरोप पत्र में अधिकारी को दोषी ठहराए जाने की कोई बात नहीं है. सैन्य कानून के तहत उसे कोर्ट मार्शल के दौरान अपना पक्ष रखने का अधिकार है. इन आरोपों को साबित करने की जिम्मेवारी अभियोजन पक्ष की होगी. (नीचे भी पढ़ें)
बताते चलें कि सेना में किसी सैन्य कर्मी के खिलाफ आरोप लगते हैं तो सबसे पहले उसकी जांच के लिए सीओआइ, यानी कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी शुरू होती है. यह ठीक वैसा ही है जौसे सिविल पुलिस में एफआइआर दर्ज होता है. कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में पूरे मामले की जांच होती है, लेकिन कोई सजा नहीं दी जा सकती. इन्क्वायरी के दौरान पूरे मामले के गवाहों के बयान दर्ज किये जाते हैं, ठीक वैसे ही, जैसे सिविल पुलिस सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान दर्ज करती है. कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आधार पर ही जिस सैन्य कर्मी पर आरोप है, उसके कमांडिंग ऑफिसर एक चार्जशीट तैयार करते हैं. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद जनरल कोर्ट मार्शल (जीसीएम) की प्रक्रिया शुरू होती है. उसी प्रकार, जैसे सिविल पुलिस इन्क्वायरी के बाद कोर्ट में ट्रायल शुरू होता है.
बताते चलें कि सेना में किसी सैन्य कर्मी के खिलाफ आरोप लगते हैं तो सबसे पहले उसकी जांच के लिए सीओआइ, यानी कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी शुरू होती है. यह ठीक वैसा ही है जौसे सिविल पुलिस में एफआइआर दर्ज होता है. कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में पूरे मामले की जांच होती है, लेकिन कोई सजा नहीं दी जा सकती. इन्क्वायरी के दौरान पूरे मामले के गवाहों के बयान दर्ज किये जाते हैं, ठीक वैसे ही, जैसे सिविल पुलिस सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान दर्ज करती है. कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आधार पर ही जिस सैन्य कर्मी पर आरोप है, उसके कमांडिंग ऑफिसर एक चार्जशीट तैयार करते हैं. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद जनरल कोर्ट मार्शल (जीसीएम) की प्रक्रिया शुरू होती है. उसी प्रकार, जैसे सिविल पुलिस इन्क्वायरी के बाद कोर्ट में ट्रायल शुरू होता है.







