ओस्लो: ओस्लो में 10 अक्टूबर की सुबह को नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कर दिया गया. इस साल नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो को मिला है. नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शांति पुरस्कार की घोषणा की गई. डोनाल्ड ट्रंप के लाख प्रयास करने के बावजूद उन्हें इस बार यह सम्मान नहीं मिला है. वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो नोबेल समिति की पहली पसंद बनी हैं.नोबेल समिति ने उनके नाम की घोषणा करते हुए, ट्विटर पर लिखा, शांति की एक साहसी और प्रतिबद्ध समर्थक को दिया जाएगा, एक ऐसी महिला को जो बढ़ते अंधकार के बीच लोकतंत्र की लौ जलाए रखती है. (नीचे भी पढ़े)
शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने दिखाया है कि लोकतंत्र के साधन शांति के भी साधन हैं. वह एक अलग भविष्य की आशा का प्रतीक हैं, जहाँ नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाती है और उनकी आवाज सुनी जाती है.पिछले साल जापान के ‘निहोन हिडांक्यो’ को दिया गया था. जापान परमाणु और हाइड्रोजन बम पीड़ित संगठनों का परिसंघ को, यह वही संगठन है जो दशकों से दुनिया को यह याद दिलाने में जुटा है कि 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर गिरे बमों की आवाज आज भी गूंजती है. विदित हो कि स्वीडिश वैज्ञानिक और आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल ने नोबेल पुरस्कार की स्थापना की थी. अपनी वसीयत में उन्होंने निर्देश दिया था कि उनकी संपत्ति का उपयोग उन व्यक्तियों को सम्मानित करने में किया जाए, जिन्होंने बीते वर्ष मानवता के हित में सबसे उल्लेखनीय योगदान दिया हो. नोबेल पुरस्कार के साथ 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोना (करीब 1.03 करोड़) की राशि दी जाती है.



