
पलामू : पर्यावरण की सुरक्षा एवं सरंक्षण को लेकर पलामू जिला प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है. आधुनिक एवं वैज्ञानिक कचड़ा प्रबंधन की तकनीक को अपनाकर स्वच्छ एवं सुंदर वातावरण बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है. उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी डॉ शांतनु कुमार अग्रहरि की अध्यक्षता में 18 फरवरी 2020 को समाहरणालय स्थित उपायुक्त के कार्यालय कक्ष में जिला पर्यावरण समिति की बैठक हुई। इसमें पुलिस अधीक्षक अजय लिंडा, नगर आयुक्त दिनेश प्रसाद भी थे. बैठक में डिस्ट्रिक्ट इन्वायरमेंट प्लान तैयार करने को लेकर गहन विचार विमर्श की गयी. साथ ही कचरा प्रबंधन, सिंगल यूज प्लास्टिक व प्लास्टिक का कैरी बैग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, साइलेंस जोन घोषित करने आदि का निर्णय लिया गया. बैठक में पलामू के शहरी क्षेत्रों में साइलेंस जोन (शांत क्षेत्र) चिन्ह्ति करते हुए उन स्थानों को साइलेंस जोन घोषित कर इससे संबंधित बोर्ड लगाने का निर्णय लिया गया. कहा गया कि अधिक क्षमता की ध्वनि को कोनों के लिए हानिकारक माना जाता है, इसलिए कुछ विशेष सार्वजनिक जगहों जैसे अस्पताल, स्कूल आदि के पास साइलेंस जोन बनाया जाये. शहर के व्यस्त जगहों पर भी साइलेंस जोन का बोर्ड लगाया जाये, ताकि गाडि़यों के हॉर्न से लोगों के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकुल असर नहीं पड़े. साथ ही डीजे बजाने पर भी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया. वहीं सिंगल यूज प्लास्टिक और प्लास्टिक के कैरी बैग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया. प्लास्टिक के इस्तेमाल करने वाले दुकान व मॉल में छापेमारी कर उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया. वहीं मेडिकल वेस्ट, ई-वेस्ट, सॉलिड वेस्ट के ठोस निपटान हेतु आवश्यक प्रक्रियाओं पर चर्चा की गयी. उपायुक्त ने कहा कि विभिन्न अस्पताल, नर्सिंग होम व क्लिनिक से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को निष्पादन के लिए व्यवस्था की गयी है. इसे प्रभावी बनाते हुए मेडिकल वेस्ट को निपटान के लिए भेजा जाये। उपायुक्त ने ई-वेस्ट(इलेक्ट्रॉनिनक कचरा) का संकलन करते हुए उसकी उचित निपटान की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि खराब टेलीविजन, रेडियो, कैमरा, कम्प्यूटर, मोबाईल फोन, इन्वर्टर, प्रिंटर्स आदि को खुले में जलाने उसका अवैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किये जाने से वायु प्रदूषण होता है. जलाने से विषैली गैसें उत्पन्न होती है. इन विषैली गैसों से मनुष्य के शरीर को नुकशान पहुंचाता है इसलिए इसका कलेक्शन कर उचित निपटान की व्यवस्था आवश्यक है. उन्होंने भूमिगत जल को भी पदूषण से रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्णय संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को दिया. वहीं टॉयलेट को सीधे ड्रेन से नहीं जोड़ने का निर्देश दिया. वहीं आमजनों से भी गंदे पानी को नदी-तालाब में नहीं गिराने व सेफ्टि टैंक बनाने की अपील की. वहीं पदाधिकारियों को कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाने एवं अन्य कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इसके अलावा छोटे-बड़े उद्योगों से निकलने वाले वेस्ट वाटर मैनेजमेंट सुनिश्चित कराने की बातें कही. साथ ही वनों आग नहीं लगने देने का निर्देश दिया. कहा कि गर्मी के दिनों में वनों में आग लगने की शिकायत मिलती है, इससे एक ओर जहां पेड़-पौधों का नुकसान होता है, वहीं पर्यावरण व वायू प्रदूषण भी होता है. उपायुक्त ने अवैध क्रसर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए, उसे ध्वस्त करने का निर्देश दिया. मौके पर उप विकास आयुक्त बिंदु माधव प्रसाद सिंह, सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ केनेडी, वन प्रमंडल पदाधिकारी राहुल कुमार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता अजय कुमार सिंह, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के गोपाल कुमार आदि उपस्थित थे.








