एनसीईआरटी की नई किताबों को लेकर कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि इंग्लिश के साथ-साथ गणित की पाठ्यपुस्तकों के नाम भी हिंदी व इंग्लिश मीडियम के लिए एक जैसा क्यों रखा गया है? भारतीय शास्त्रीय संगीत से लिये गए शब्दों का उपयोग सार्थक है, यह कदम एनसीईआरटी के भाषा पाठ्यक्रम में बदलाव का हिस्सा है, जिसमें भाषा सीखने के लिए छात्र की रुचि को बढ़ावा देने और भारतीय संस्कृति को सम्मिलित करने का प्रयास किया जा रहा है. (नीचे भी पढ़ें)

एनसीईआरटी के अनुसार अब तक जो फीडबैक आया है, उसमें नई किताबों को पहली बार 5 स्टार रेटिंग मिली है. इससे पूर्व इनकी 2 स्टार रेटिंग ही थी. कहा जा रहा है कि जो लोग इन किताबों के नामों को हिंदी या अंग्रेजी के नाम पर विरोध को हवा दे रहे हैं, यही लोग पहले भी शिक्षा नीति का विरोध कर रहे थे. एनसीईआरटी का कहना है कि भारत की समृद्ध संगीत विरासत के ये एलिमेंट (तत्व) देश की सभी भाषाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं में समान हैं. यह दृष्टिकोण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन के साथ जुड़ा हुआ है, जो आनंदपूर्ण शिक्षा, सांस्कृतिक जुड़ाव और शिक्षा में कला और संगीत के एकीकरण पर जोर देती है. (नीचे भी पढ़ें)

वास्तव में नई शिक्षा नीति यह मानती है कि कला और संगीत भाषाई बाधाओं से परे है और भाषा को सीखने में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करते हैं. अंग्रेजी की किताबों में पहले ज्यादा पश्चिम की कहानी पढ़ाई जाती थी, लेकिन अब इनमें भारत की महान हस्तियों के बारे में छात्रों को पढ़ाया जाएगा. साथ ही, एनसीईआरटी ने सुनिश्चित किया है कि इन पुस्तकों का सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जाए. (नीचे भी पढ़ें)

एनसीईआरटी की कक्षा 1 और 2 की अंग्रेजी किताबें अब ‘मृदंग’ कहलाएंगी, जो मृदंगम से लिया गया है, जो कर्नाटक संगीत से जुड़ा एक व्यापक रूप से पहचाना जाने वाला वाद्य यंत्र है. कक्षा 3 की अंग्रेजी की किताबें “संतूर” के नाम से होंगी, जो पूरे देश के सांस्कृतिक संदर्भों से भरी है. मृदंग किताब के एक चैप्टर में दक्षिण भारतीय परिवार को दिखाया गया है तो वहीं एक अन्य चैप्टर में सिख बच्चे खेलते दिख रहे हैं. एक चैप्टर ऑल इंडियंस में 12 राज्यों के बारे में जानकारी दी गई है. फारसी मूल के कश्मीरी लोक वाद्य यंत्र के नाम पर संतूर नामक पाठ्यपुस्तक यह सुनिश्चित करती है कि अंग्रेजी सीखना भारतीय संस्कृति के संदर्भ में हो. (नीचे भी पढ़ें)

कक्षा 6 और 7 की अंग्रेजी की किताबें ‘पूर्वी’ नाम से आई हैं, जिनमें कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, गोवा, तमिलनाडु समेत कई राज्यों से उदाहरण लिए गए हैं. एनसीईआरटी के एक अधिकारी ने कहा, ‘यह बहुत हैरानी की बात है कि किताब का नाम ‘गणित प्रकाश’ रखने पर भी आपत्ति है? किताब का टाइटल आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, ब्रह्मगुप्त और श्रीनिवास रामानुजन जैसे महान भारतीय गणितज्ञों के योगदान को दर्शाता है. तमिलनाडु में त्रिभाषा फॉर्मूले पर विवाद अभी थमा नहीं कि अब एनसीईआरटी की किताबों के नाम पर विवाद शुरू हो गया है. एनसीईआरटी का मानना है कि नई किताबों का नामकरण एनईपी 2020 एवं एनसीएफ 2023 के आधार पर किया गया है.



