सरायकेला : अपनी चार सूत्री मांगों को लेकर ओलचिकी हुल बैसी द्वारा आहूत झारखण्ड बंद का मंगलवार को सरायकेला में खासा असर देखा गया. बंद समर्थकों ने राजनगर, सरायकेला और गम्हरिया की सड़कों पर उतरकर अलग-अलग खेमों में बंटकर बंद कराया. इस दौरान बंद समर्थकों ने जगह-जगह नाकेबंदी कर और टायर जलाकर अपना विरोध प्रदर्शित किया. बंद समर्थकों ने टाटा- कांड्रा मार्ग पर उषा मोड़ के समीप टायर जलाकर मार्ग को अवरुद्ध कर दिया. उधर सराइकेला के बिरसा चौक पर भी बंद समर्थकों ने सड़क जाम कर दिया, जबकि राजनगर में सिद्धू-कान्हू चौक के पास आवागमन ठप्प कर दिया. (नीचे भी पढ़ें)

बता दें कि बंद को आदिवासी सुरक्षा परिषद का भी समर्थन प्राप्त है. सुबह से ही बंद समर्थक पारंपरिक हथियारों से लैस होकर जिले में प्रवेश करने वाले सभी मार्गों पर डट गए और आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया. इस वजह से लोग जहां-तहां फंस गये. बता दें कि ओलचिकी हुल बैसी की मुख्य मांग संताल भाषा को प्रथम राजभाषा का दर्जा देने, अलग से संताली एकेडमी का गठन करने, संताली भाषा का ओलचिकी लिपि में पुस्तकों का मुद्रण एवं पठन-पाठन आरंभ करने, संताली शिक्षकों की बहाली करना है. इन मांगों को लेकर वे लगातार सरकार तक अपनी मांगें पहुंचा रहे हैं.(नीचे भी पढ़ें)

बंद समर्थकों ने बताया कि झारखंड सरकार द्वारा लगातार उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे थक-हार कर उन्हें आंदोलन का रुख अख्तियार करना पड़ा है. बंद समर्थकों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा.
चांडिल क्षेत्र में भी बंद रहा असरदार

सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल में भी झारखंड बंद का असर व्यापक असर दिखा. बंद समर्थकों ने एनएच 33 पर टायर जलाकर यातायात अवरुद्ध कर दिया, जिसके कारण चांडिल गोलचक्कर में गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं इस मौके पर ओलचिकी हुल बैसी के सरायकेला जिला अध्यक्ष डॉ अर्जुन टुडू, छात्र संगठन के सुदामा हेंब्रम, गोपाल मार्डी, गोपाल टुडू, अनिमा टुडू, लखन मुर्मू, दिनेश सोरेन, सुजन किस्कू, रतन मार्डी, नरेंद्र हांसदा, सुमित टुडू, फागुन मार्डी, सुमित मार्डी, मंगल हांसदा आदि सहित हजारों की संख्या में महिला पुरुष पारंपरिक पोशाक, वाद्ययंत्र व पारंपारिक हथियारों के साथ बंद कराने के लिए निकले.



