राजनगर : आदिवासी सांवता सुसार अखड़ा के तत्वावधान में शुक्रवार को राजनगर फुटबॉल मैदान में वीर शहीद सिदो कान्हू की जयंती मनाई गई. कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री सह विधायक चंपाई सोरेन उपस्थित रहे. उनके अलावा आदिवासी समाज के विभिन्न पीड़ों के माझी परगना, देश परगना भी शामिल रहे. कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने अपने 45 साल के राजनीतिक एवं सामाजिक आंदोलन के अनुभव लोगों के साथ साझा किये. (नीचे भी पढ़ें)

श्री सोरेन ने कहा कि वे आदिवासी समाज के अस्तित्व को बचाने व झारखंड आंदोलन की लड़ाई में इतने व्यस्त रहे कि उनके बच्चे कब बड़े होते गए, उन्हें पता ही नहीं चला. आज आदिवासी समाज पर अस्तित्व व पहचान का खतरा मंडरा रहा है. सिदो- कान्हू ने आदिवासी समाज को बचाने के लिए अंग्रेजी हुकूमत एवं महाजनों से लड़ाई लड़ी थी, जिससे एसपीटी एक्ट बना और आदिवासियों की जल-जंगल-जमीन की रक्षा हो सकी. आज उसी संताल परगना में आदिवासियों का इसाई धर्म में परिवर्तन होने एवं बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा आदिवासी समाज की बहू-बेटियों से शादी कर लेने के कारण आदिवासी समाज का अस्तित्व व पहचान खत्म हो गया है. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने कहा कि गांव के गांव ईसाई बन गए हैं, जिससे हमारी पारम्परिक रूढ़िवादी मांझी-परगना व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. आज वहां आदिवासी संथाल समाज अल्पसंख्यक हो गया है. कौन ईसाई है, कौन सरना धर्मवलंबी है, यह चिंता का विषय है. चंपाई ने मतांतरण के खिलाफ आदिवासी समाज को आगाह करते हुए कहा कि यदि आज नहीं जागे तो एक दिन आदिवासियों का अस्तित्व पूरी तरह से मिट जाएगा. उन्होंने कोल्हान एवं संताल परगना में आदिवासियों के अस्तित्व की लड़ाई लड़ने की बात कही. इस लड़ाई में उन्होंने साथ देने की अपील की तो सभी ने हाथ उठाकर सहमति जताई. (नीचे भी पढ़ें)
धर्म बदलने वालों को नहीं मिले आदिवासी आरक्षण का लाभ
श्री सोरेन ने राजनगर से धर्मांतरण के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंकते हुए कहा कि अब आदिवासी आरक्षण का दोहरा लाभ किसी भी कीमत पर नहीं लेने दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज से अलग होकर दूसरा धर्म अपनाने के बाद भी हमारे आरक्षण पर डाका डाला जा रहा है. जागो आदिवासी जागो नहीं तो हमलोग एक दिन न मुखिया, न विधायक और न ही सांसद बन पाएंगे. वहीं चंपाई ने हेमंत सरकार को मतांतरण एवं बांग्लादेशी घुसपैठ पर गूंगा व बहरा कहकर लतेड़ते हुए आदिवासी विरोधी बताया. वहीं इससे पूर्व चंपाई ने गमदेसाई जाहेरथान में मत्था टेका. इसके बाद वीर सिदो- कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. कार्यक्रम में बोरो पीढ़ परगना नन्दलाल टुडू, हल्दीपोखर तरफ परगना सुशील हांसदा, जुगसालाई तरफ परगना दसमत हांसदा, कुचुंग दिशोम देश परगना पिथो मार्डी, सिमल सोरेन, बबलू सोरेन, जिप अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, उपाध्यक्ष मधुश्री महतो, जिप सदस्य मालती देवगम, मुखिया राजो टुडू, विष्णु मुर्मू, जयराम मुर्मू, सुराय मुर्मू, सागेन टुडू, मार्शल पुर्ती, डोबरो देवगम सहित हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के महिला पुरुष शामिल हुए..




