सरायकेला : सरायकेला सदर अस्पताल के चिकित्सकों की कार्यशैली धीरे-धीरे मरीजों के लिए जी का जंजाल बनती जा रही है. यह अस्पताल चिकित्सा सुविधाओं के लिए कम, लगभग सभी मरीजों को रेफर करते जाने के कारण रेफरल अस्पताल के रूप में अधिक जाना जाने लगा है. यहां के चिकित्सक मनमाने ढंग से अपनी ड्यूटी करते हैं. कुछ चिकित्सक तो ऐसे हैं जिनका व्यवहार मरीजों के साथ जेल के कैदियों से भी बदतर है. वहीं कुछ चिकित्सक अपनी ड्यूटी से हमेशा गायब रहने के लिए प्रसिद्ध हो गए हैं. (नीचे भी पढ़ें)

एक ऐसे ही चिकित्सक हैं डॉ रजक. डॉ उमेश रजक शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में पदस्थापित हैं, किंतु वे सदर अस्पताल में कम और अपने किसी निजी क्लिनिक में अधिक समय देते हैं, जिसके कारण अपने बच्चों का इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल पहुंचने वाले गरीब परिजनों के पास बीमार बच्चे के साथ डॉक्टर साहब का घंटो इंतजार करने को मजबूर हैं. बुधवार को एक ऐसा ही वाकया सामने आया. अस्पताल में चिकित्सक की ड्यूटी सुबह 9 बजे से थी. गरीब परिवारों के लोग अपने बच्चों का उपचार कराने के लिए सुबह से ही पर्ची बनवाकर लाइन में खड़े डॉक्टर साहब का इंतजार कर रहे थे. किंतु 11 बजे तक भी डॉक्टर साहब ड्यूटी पर नहीं पहुंचे. चिकित्सक के समय से अस्पताल नहीं पहुंचने के कारण बीमार बच्चे तड़पते रहे और उनके परिजन लाइन में खड़े बच्चों को ढाढस बंधाते, डॉक्टर साहब का इंतजार करते रहे. (नीचे भी पढ़ें)
अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि डॉ रजक की यही दिनचर्या बन चुकी है. वे कभी भी 12 बजे से पहले ड्यूटी पर नहीं आते. सदर अस्पताल के चिकत्सक ही नहीं, कई ऐसे अस्पताल कर्मी भी हैं जो समय से अस्पताल नहीं आते और आते भी हैं तो थोड़ी देर बाद बाहर निकल जाते हैं. मालूम हो कि सदर अस्पताल के ओपीडी का समय सुबह 9 बजे से है, किन्तु शायद ही कोई सुबह समय से अस्पताल पहुंचता हो. आखिर गरीबों के लिए बने सदर अस्पताल की व्यवस्था कब दुरुस्त होगी? इस संबंध में जब सिविल सर्जन अजय कुमार सिन्हा से इस संबंध में पूछा गया तो उनका जवाब था कि वे इस मामले की जांच करेंगे. जांच में सही जा पाए जाने पर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.



