नई दिल्ली : पूर्व रेल मंत्री सह जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी व अन्य को आज राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रहे लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में गुरुवार बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव एवं राबड़ी देवे की ओर से की गई कुछ दस्तावेज सौंपे जाने की मांग वाली याचिका को न सिर्फ खारिज कर दिया, बल्कि यह भी कहा कि यह ट्रायल में देरी करने का बहाना मात्र है. (नीचे भी पढ़ें)
बताते चलें कि लालू प्रसाद यादव एवं राबड़ी देवी की ओर से राउज एवेन्यू कोर्ट में जमीन लेकर नौकरी देने से संबंधित उक्त मामले में अपनी दलीलें तैयार करने के लिए 1600 से अधिक ‘अनरिलाइड’ दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए याचिका दाखिल की थी. लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं. जानकारी हो कि ‘अनरिलाइड’ दस्तावेज वे सामग्रियां होती हैं जिन्हों जांच एजेंसियां जब्त तो करती हैं, लेकिन अभियोजन पक्ष की शिकायत में उन पर भरोसा नहीं करतीं. इन्हें अविश्वसनीय दस्तावेज की श्रेणी में रखा जाता है. अदालत ने कहा कि ये याचिकाएं मुकदमे को शुरुआत में ही पेचीदगियों की भूलभुलैया में धकेलने के लिए दायर की गई हैं. (नीचे भी पढ़ें)
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि इन दस्तावेजों को एकमुश्त उपलद्ध कराना न केवल उलटी गंगा बहाने जैसा होगा, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया को भी पूरी तरह अव्यवस्थित कर देगा. उन्होंने दो अन्य आरोपियों- लालू प्रसाद यादव के निजी सचिव (पीएस) आरके महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज कर दीं. महाजन ने एक अनरिलाइड दस्तावेज और कपूर ने ऐसे 23 दस्तावेज उपलब्ध कराने का आग्रह किया था. सीबीआइ के अनुसार, यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्यप्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेल के पश्चिम मध्य जोन में चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों से जुड़ा है. आरोप है कि भर्ती किये गए लोगों ने इन नियुक्तियों के बदले राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों को भूखंड दिये. लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी, दो बेटियों और अन्य लोगों के खिलाफ 18 मई 2022 को यह मामला दर्ज किया गया था. न्यायाधीश गोगने ने अपने आदेश में कहा कि मुकदमे पर से अदालत का वैधानिक नियंत्रण आरोपियों द्वारा जिरह की आड़ में हथियाया नहीं जा सकता और ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदकों का कार्यवाही को लंबा खींचने का गुप्त इरादा है. (नीचे भी पढ़ें)
कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार और कार्यवाही का शीघ्र समापन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप साक्ष्यों को दर्ज करना आवश्यक है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी यह अनुरोध कर रहे हैं कि बचाव की तैयारी शुरू करने से पहले उन्हें सभी या कुछ अनरिलाइड दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं, यानी जिरह शुरू करने के लिए ऐसे दस्तावेजों की उपलब्धता को एक शर्त के रूप में पेश किया जा रहा है. कोर्ट ने याचिकाओं को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि आरोपियों को न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर कोई शर्त लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. अदालत ने कहा कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था, जो साक्ष्यों के उस समूह का हिस्सा हैं, अभियोजन की शिकायत में जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया.



