
जमशेदपुर : टाटा स्टील ने अपनी खदानों और अपने बेनेफिसिएशन संयंत्रों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स के ऑटोमेशन और डिजिटलीकरण के क्षेत्र में कई पहल की हैं. कंपनी द्वारा लगातार डिजिटल माइनिंग पर जोर दिया गया है ताकि किसी तरह के हादसे को रोका जा सके और पर्यावरण के संसाधन का सही उपयोग हो सके. इस कड़ी में टाटा स्टील ने अपने खदानों में डिजिटल संचार और डेटा ट्रांसफर के लिए एलएएन/डब्ल्यूएएन (लैन/वैन) के बैंडविड्थ में सुधार किया है. इसके अलावा ई-परमिट, सुरक्षा कार्ड, वीडियो-एनालिटिक्स, ऑनलाइन सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली और ऑनलाइन सुरक्षा प्रबंधन योजना आदि के माध्यम से खदानों की सुरक्षा में आईटी में सुधार किया है. इसके अलावा सुरक्षा, उत्पादन, गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) के लिए डिजिटल डाटा कैप्चरिंग और एकीकृत ऑनलाइन रिपोर्ट तय किया गया है. इसके अलावा आईओटी का उपयोग कर डेटा की ऑटोमैटिक कैप्चरिंग या ओएफसी का उपयोग कर डिजिटल डेटा ट्रांसमिशन के लिए संयत्र और खनन के उपकरण का ऑटोमेशन/सेंसराइजेशन किये जाने की जरूरत है. इसी तरह कन्वेयर और पंप जैसे उपकरणों के रिमोट नियंत्रित संचालन किया गया है. डिजिटलीकरण के तहत संयंत्र और खदान के संचालन की केंद्रीकृत निगरानी रखा जायेगा. इसके अलावा खदान उपकरण प्रदर्शन और ऑपरेटर प्रदर्शन के रियल टाइम कैप्चरिंग के लिए फ्लीट मैनेजमेंट सिस्टम को लाया गया है. इसके अलावा ड्रोन सर्वेक्षण और जीआईएस-आधारित प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर डिजिटल माइन मैपिंग भी किया जा रहा है. इन डिजिटल/ऑटोमेशन पहलकदमियों ने कंपनी को सूचना प्रवाह, डेटा पारदर्शिता और निर्णय लेने में बड़े सुधार करने में मदद की है. इन पहलों ने दक्षता, उत्पादकता और सुरक्षा में सुधार करने में मदद की है. अब तक किए गए प्रयासों को और अधिक परिष्कृत करने तथा सभी खदानों में दोहराने की जरूरत है. विभिन्न सेंसर और इंस्ट्रूमेंटेशन द्वारा ऑनलाइन कैप्चर किए गए विशाल डेटा को समझने के लिए एआई और एमएल का उपयोग कर डेटा माइनिंग को भविष्य में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. अंतिम उद्देश्य रिमोट-नियंत्रित खदानों का होना होगा, जिन्हें अधिक सुरक्षित और टिकाऊ (सस्टेनेबल) खनन कार्यों के लिए कहीं से भी निगरानी कर सकते हैं जबकि प्रबंधकीय कौशल अपनी प्रासंगिकता बनाए रखेंगे, एचआर के नजरिए से सॉफ्टवेयर और विश्लेषणात्मक कौशल (एनालिटिकल स्किल्स) भविष्य में जल्दी ही महत्वपूर्ण हो जाएंगे. “माइनिंग 4.0”, “डिजिटल ट्रांसफ़ॉर्मेशन”, “स्मार्ट माइनिंग” ऐसे शब्द हैं, जिन्हें खनन में डिजिटलीकरण की बढ़ती स्वीकार्यता का वर्णन करने के लिए गढ़े गए हैं. दरअसल, कोविड-19 महामारी ने इस संबंध में प्रवृत्ति को और तेज किया है. आने वाले समय में खनन उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त, खदान की निगरानी के डिजिटल साधनों द्वारा सक्षम सस्टेनेबल माइन प्लानिंग के माध्यम से इसके संसाधनों का उपयोग करने की कंपनी की क्षमता पर और अधिक निर्भर होगा. इसके साथ-ही-साथ, योजना का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा और मैन-मशीन इंटरफ़ेस को नगण्य तक न्यूनतम करने के लिए ऑटोमेशन का इष्टतम लाभ उठाना होगा. एक एकीकृत सप्लाई चेन में ऑपरेशन से लेकर बेनेफिसिएशन और स्टैकिंग (भंडारण) से लेकर ग्राहकों के परिसर में परिवहन तक, डिजिटल साधनों के जरिए कठोर निगरानी और नियंत्रण की आवश्यकता होती है. डिजिटल हस्तक्षेप कई खनन कार्यक्षेत्रों में दृश्यता और एकीकरण (विजिबिलिटी व इंटीग्रेशन) प्रदान करते हैं और इससे वास्तविक समय (रियल टाइम) निर्णय लेने में मदद मिलती है, जो अधिक दक्षता एवं उच्च उत्पादकता की कुंजी है. खनन में डिजिटलीकरण के कई फायदे हैं. इनमें खदान की अधिकतम सुरक्षा, बेहतर माइन प्लानिंग और मिनरल रिसोर्स विजिबिलिटी के जरिए खदानों का लंबा जीवन शामिल है. डिजिटलीकरण रियल टाइम डेटा और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके लक्षित रणनीतियों को विकसित करने में मदद करता है, विफलता के पूर्वानुमान के लिए विज़ुअलाइज़ेशन और डिसीजन मैट्रिक्स टूल्स प्रदान करता है, शेड्यूलिंग और सामग्री के प्रवाह को अनुकूलित करने में मदद करता है तथा क्वालिटी डेटा की ऑनलाइन निगरानी के माध्यम से बेनेफिसिएशन संयंत्रों की क्षमता में सुधार करता है. यह उपकरण, संयंत्रों और ऑपरेटर परफॉर्मेंस व कैपिटल-इंटेन्सिव माइनिंग उपकरणों के दोहन की रियल टाइम मॉनिटरिंग के द्वारा उत्पादकता में सुधार करने में भी मदद करता है. डिजिटलीकरण सटीक भूमि उपयोग योजना और दृश्यता व ड्रोन/स्कैनर प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर सटीक मात्रा मापण के माध्यम से वैधानिक आवश्यकताओं के अनुपालन की सुविधा भी प्रदान करता है.
खदानों के डिजिटलीकरण के लिए उपयोग की जाने वाली कुछ प्रौद्योगिकियां इस प्रकार हैं :
1) ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और ऑपरेशनल हार्डवेयर
2) डिजिटल रूप से सक्षम कार्यबल
3) एकीकृत उद्यम, प्लेटफॉर्म और इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र)
4) अगली पीढ़ी के एनालिटिक्स और निर्णय समर्थन (डिसीजन सपोर्ट)
5) एकीकृत खान योजना,
6) ड्रोन सर्वेक्षण, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस-आधारित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से डिजिटल माइन मैपिंग।





