
जमशेदपुर : टाटा स्टील में कर्मचारियों के रजिस्टर्ड बच्चों (रजिस्टर्ड रिलेशंस) की बहाली निकने वाली है. बुधवार को इसको लेकर महत्पूर्ण बैठक टाटा स्टील के वीपी एचआरएम सुरेश दत्त त्रिपाठी, नयी नामित वीपी एचआरएम अतरई सरकार, जुबिन पालिया के साथ टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय के बीच हुई. इस बैठक के बाद समझौता पर हस्ताक्षर किया गया. इस समझौता के तहत टाटा स्टील के सारे रजिर्स्ड रिलेशंस के लिए 500 की बहाली होगी. वेज रिवीजन समझौता के वक्त ही यूनियन और मैनेजमेंट ने सैद्धांतिक तौर पर सहमत हो गये थे कि 500 बहाली निकलेगी, लेकिन इसको लेकर अंतिम समझौता बुधवार को हुआ, जिसमें तय किया गया कि तीन साल में 500 बहालियां होगी, जिसके तहत पहले साल 175, दूसरे साल 175 और तीसरे साल 150 रजिस्टर्ड रिलेशंस (टाटा स्टील के वर्तमान या सेवानिवृत कर्मचारियों के बच्चे या जो रजिस्टर्ड हो) की बहाली होगी. बहाली 2021 के कोरोना का संक्रमण समाप्त होने के बाद होगा. करीब दस हजार से भी ज्यादा रजिस्टर्ड रिलेशंस है, जो इसमें भाग लेंगे, जिस कारण इसकी बहाली के लिए अभी स्कूल या कॉलेज खुलने का इंतजार करना होगा, जिसके बाद बहाली निकलेगी. यह उम्मीद की जा रही है कि फरवरी 2021 तक बहाली निकल जायेगी. इसके लिए 18 साल से लेकर 42 साल तक के उम्र के रजिस्टर्ड रिलेशंस ही भाग ले सकेंगे. इसके लिए पहली बार हिंदी और अंग्रेजी में बहाली के लिए परीक्षा ली जायेगी यानी कोई भी कर्मचारी का रजिस्टर्ड रिलेशंस अपनी सुविधा के मुताबिक हिंदी या अंग्रेजी में परीक्षा दे सकता है. मैट्रिक तक के सवाल ही आवेदकों से पूछा जायेगा. वर्तमान में कार्यरत या सेवानिवृत कर्मचारी के रजिस्टर्ड रिलेशंस इस परीक्षा में हिस्सा ले सकेंगे, जिसके लिए फार्म जल्द निकलेगा. लिखित परीक्षा के बाद सीधे मेडिकल टेस्ट होने के बाद बहाली हो जायेगी. पहला एक साल उक्त बहाल व्यक्ति को ट्रेनिंग में रखा जायेगा, जिसके दौरान एक साल तक सरकार के गाइडलाइन के मुताबिक स्टाइपेंड (अभी 8778 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड चल रहा है) दिया जायेगा. यह बहाली वैसे तो तीन साल में होगी, लेकिन परीक्षा और बहाली की सारी प्रक्रिया एक साथ ही हो जायेगी, जिसके बाद उनकी ज्वाइनिंग तीन साल में होगी, जिसके तहत पहले साल 175, दूसरे साल 175 और तीसरे साल 150 लोगों की बहाली होगी. बहाली को लेकर मैट्रिक पास होना अनिवार्य है. इसकी जानकारी टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय समेत तमाम लोगों ने संवाददाता सम्मेलन में दी. वैसे सारे लोगों ने इसकी सराहना की क्योंकि कोरोना काल में जहां लोगों की नौकरियां जा रही है, उसके विपरित टाटा स्टील में बहाली निकाली गयी है. (नीचे पढ़े पूरी खबरें समझौता क्या-क्या हुआ.)
टाटा स्टील के वर्तमान और रिटायर्ड कर्मचारी के मेडिकल सुविधाओं को सस्ता और फ्री किया गया
टाटा स्टील में बुधवार को हुए समझौता के साथ ही कर्मचारियों या सेवानिवृत कर्मचारियों को मिलने वाली कई सारी मेडिकल सुविधाओं पर लगने वाले फीस की राशि को भी कम कर दिया गया है. कई दवा या इंप्लांट या कई सारे इलाज का कर्मचारियों या उनके परिवार या फिर सेवानिवृत कर्मचारी या उनके परिवार के लोगों को पैसा देना पड़ता था, लेकिन अब यह तय हो गया है कि पैसे कम लगेंगे या नहीं लगेंगे. एक दिसंबर 2020 से इसको लागू किया गया है. (नीचे पढ़े पूरी खबरें समझौता क्या-क्या हुआ.)
www.sharpbharat.com की खबर सही साबित
आपके लोकप्रिय न्यूज वेबसाइट www.sharpbharat.com की खबर सही साबित हुई है. 3 सितंबर 2020 को ही शार्प भारत ने यह जानकारी दी थी कि अक्तूबर माह तक बहाली निकलेगी, जो अब सही साबित हुई है. अक्तूबर की तिथि को बढ़ाकर सिर्फ नवंबर के पहले सप्ताह में मैनेजमेंट और यूनियन ने समझौता किया है. (नीचे पढ़े पूरी खबरें समझौता क्या-क्या हुआ.)

वर्तमान कर्मचारियों और सेवानिवृत कर्माचरियों को मिलने वाली मेडिकल सुविधाओं पर लगने वाला पैसा का पूरा ब्योरा और छूट की जानकारी : (नीचे पढ़े पूरी खबरें समझौता क्या-क्या हुआ.)
- कर्मचारियों को एक लाख रुपये तक कोकलियर इंप्लांट यानी सुनने में होने वाली दिक्कतों से जुड़े हुए उपकरण को लगाने के लिए एक लाख रुपये तक की छूट टाटा स्टील के कर्मचारियों को मिलेगा. यह सुविधा पूरे जीवन में एक बार मिलेगा. इसके तहत अगर किसी कर्मचारी को कान में सुनने वाली मशीन तीन लाख रुपये तक का लगना है या उससे जुड़े उपकरण लगाना है तो उस पर एक लाख रुपये की सब्सिडी या छूट टाटा स्टील की ओर से दी जायेगी. सेवानिवृत कर्मचारियों को यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त में ही मिलेगी, जिसका पैसा अब तक लगता था.
- आंख में लगने वाले इंट्रा ऑक्यूलर लेंस पर कर्मचारियों और उनके परिजन को 400 रुपये की छूट मिलती थी, जिसकी राशि को बढ़ाकर 1000 रुपये कर दी गयी है. यानी अगर आप पांच हजार का उपंकरण लगाते है तो उस पर पहले 400 रुपये तक की छूट मिलती थी, लेकिन अब 1000 रुपये तक की छूट मिलेगी.
- अगर कोई कर्मचारी पेसमेकर लगाता है तो उसको पहले 38 हजार रुपये की छूट मिलती थी, जिसको बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गयी है यानी अगर किसी कर्मचारी या उनके परिजन को पेसमेकर लगता है तो अगर पेसमेकर की कीमत एक लाख रुपये कीमत है तो उस पर पहले 38 हजार रुपये तक की छूट मिलती थी, जिसको बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया है.
- टाटा स्टील के कर्माचरी या उनके परिजन का हिप (कुल्हे) या घुटने को बदला जाता है तो उस पर 25 हजार रुपये की छूट थी, जिसको बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया गया है. यानी अगर कोई कर्मचारी के कुल्हे या घुटने को बदलने पर एक लाख खर्च होता है तो अब कर्मचारियों को एक लाख रुपये में से सिर्फ 60 हजार रुपये ही देना पड़ेगा.
- कर्मचारियों को कई सारे ऐसी दवा जो कैंसर, किडनी समेत कई असाध्य रोग की दवा पर पैसे लिये जाते थे, उसको अब पूरी तरह मुफ्त कर दिया गया है. केमोथेरेपी से लेकर तमाम सुविधाओं को मुफ्त कर दिया गया है, जिसका पैसा अब तक लगा करता था.
- बोन मिनरल डेंसिटोमेटरी टेस्ट को पूरी तरह फ्री कर दिया गया है, जिसका पैसा लगता था. सेवानिवृत कर्मचारियों का भी बोन मिनरल डेंसिटोमेटरी टेस्ट को मउफ्त कर दिया गया है.
- राष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण जो अनिवार्य है, वह कर्मचारियों और उनके परिजनों को मुफ्त कर दिया गया है. सेवानिवृत कर्मचारियों को भी राष्ट्रीय टीकाकरण योजना के तहत अनिवार्य को मुफ्त कर दिया गया है.
- कोई कर्मचारी अगर रेफरल में जाता है तो टीए और डीए के नये नियम के तहत मिला करेगा. यानी अगर कोई कर्मचारी या परिजन रेफर होता है तो उसको टीए और डीए का पैसा नये नियम के तहत दिया जायेगा.
- केबिन का चार्ज अब तक कर्मचारी या सेवानिवृत कर्मचारी को 25 रुपये रोजाना लगता था, लेकिन अब इसके लिए कर्मचारियों को सौ रुपये देने होंगे, जिसमें अबप सुविधाएं भी बढ़ायी गयी है.
- दांत के इलाज की व्यवस्था को भी बदला गया है. इसके तहत अगर कोई कर्मचारी अपना छह दांत बदलता है तो उसका 800 रुपये, अगर पूरा ऊपर या नीचे का दांत बदलता है तो उनको 1000 रुपये जबकि अगर सारा 32 दांत कोई बदलता है तो उसको 2000 रुपये देने होंगे.
- सेवानिवृत कर्मचारियों को टीएमएच में हर तरह के इंप्लांट को मुफ्त कर दिया गया है.
- कैथलैब यानी दिल के रोगी को पहले 25 फीसदी ही पूरे खर्च पर राशि मिलती थी, जिसको बढ़ाकर शत-प्रतिशत कर दिया गया है यानी सेवानिवृत कर्मचारियों को कैथलैब की सुविधा मुफ्त मिलेगी सिर्फ स्टेंट और अन्य सामानों का पैसा लगेगा.






