
जमशेदपुर : टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन और कंपनी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सह सीएफओ कौशिक चटर्जी ने संयुक्त रुप से कंपनी के विकास की योजनाओं का खुलासा किया है. टाटा स्टील की वार्षिक रिपोर्ट में दोनों ही अधिकारियों ने इसका खुलासा किया है. टीवी नरेंद्रन और कौशिक चटर्जी ने कहा है कि दोनों ही प्रबंधकीय प्रधान ने बताया है कि कंपनी का दीर्घकालीन दृष्टिकोण भारत में विकास करना है, गति बनाए रखना है. देश में बढ़े डिमांड के तहत काम करना है. दोनों ने कहा कि मांग के आधार पर ही विस्तार होता रहेगा और समय की मांग को देखने के बाद ही फैसला लिया जायेगा. इन दोनों ने बताया कि वर्तमान में टाटा स्टील का विस्तार पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. अत्याधुनिक 8 मिलियन टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता टाटा स्टील के कलिंगानगर प्रोजेक्ट में किया जाना है. वित्त वर्ष 2022-2023 के दौरान, टाटा स्टील वहां पिलेट प्लांट की शुरुआत करने जा रही है, जिसका काम 70 फीसदी पूरा हो चुका है. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से कोल्ड रोलिंग मिल कांप्लेक्स के साथ पिकलिंग लाइन की शुरुआत कर दी जायेगी. वहां एडवांस्ड स्टील का उत्पादन की क्षमता का भी विकास किया जायेगा. दोनों ने बताया कि टाटा स्टील वित्तीय वर्ष 2022-2023 के दौरान भारत में स्टील की क्षमता बढ़ायेगी. डाउनस्ट्रीम में वैल्यू एडिशन किया जायेगा. एमडी और इडी ने बताया कि कार्बन उत्सर्जन को कम करना बड़ी चुनौती होगी. टाटा मेटालिक्स में आयरन डक्टाइल पाइप लगाने का काम होगा. खड़गपुर प्लांट की क्षमता को दोगुना किया जाना है. जमशेदपुर के टाटा स्टील प्लांट में वायर रॉट कांबी मिल की स्थापना की जायेगी जबकि 0.5 मिलियन टन का स्पेशल बार बनाने का मिल बनाया जायेगा. टिनप्लेट कंपनी का भी विस्तार दोगुना किया जाना है. नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड के प्लांट को भी विस्तार देना है. बिलेट बनाने की क्षमता को 1.1 मिलियन टन 12 माह में किया जाना है. (नीचे देखे पूरी खबर)

कंपनी के घाटे को कम करना बड़ी चुनौती है, जिसको पूरा करना है
टाटा स्टील के एमडी और इडी ने संयुक्त रुप से बताया कि कंपनी की ओर से भूषण स्टील और उषा मार्टिन स्टील बिजनेस का टेकओवर किया गया है. इसके विकास और इसको व्यवस्थित करने का काम हो रहा है. इसके अलावा सबसे ज्यादा अपने कर्ज को कम करना बड़ी चुनौती होगी. उन्होंने बताया कि करीब दो साल में करीब 50 हजार करोड़ रुपये के घाटे को कम किया है. टाटा स्टील का वित्तीय वर्ष 2021-2022 में फ्री कैश फ्लो 27185 करोड़ रुपये था, जो उससे पहले साल में यानी वित्तीय वर्ष 2020-2021 में 23748 करोड़ रुपये था. 9618 करोड़ रुपये का वर्किंग कैपिटल में बढ़ोत्तरी की गयी है. टाटा स्टील ने इनकम टैक्स में 11902 करोड़ रुपये का पेमेंट किया है. (नीचे देखे पूरी खबर)

नये मैटेरियल बिजनेस में विस्तार करेगी टाटा स्टील
टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन और एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर कौशिक चटर्जी ने संयुक्त रुप से बताया कि नये मैटेरियल बिजनेस में वे लोग कदम रख चुके है. ग्रेफाइन के साथ मेडिकल मैटेरियल व डिवाइस बनाने के साथ कंपोजिट को बनाने की योजना पर काम चल रहा है. ग्रेफाइन का करीब 100 टन प्रति वर्ष का उत्पादन भी शुरू किया जा चुका है. अब मेडिकल मैटेरियल में निवेश किया जा रहा है और बाजार के नये अवसरों को देखकर काम किया जा रहा है. कंपनी के दोनों लीडरों ने बताया कि सबसे पहला पसंद चिकित्सा सामग्री हाइड्रोक्सीपाटाइट है, जो एक कैल्शियम फॉस्फेट-आधारित सिरेमिक है, जो, आर्थोपेडिक कोटिंग (हड्डियों को जोड़ने में सहायक) में उपयोग किया जाता है. इसके अलावा उसके प्रत्यारोपण, दंत प्रत्यारोपण, अस्थि भराव, सौंदर्य प्रसाधन भी उपभोक्ता उत्पादों के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है. इन दोनों ने बताया कि हमारी ताकत मजबूत सामग्री अनुसंधान और विकास, ब्रांडिंग और विपणन और बिक्री पहुंच है. (नीचे देखे पूरी खबर)

रुस और यूक्रेन युद्ध का पड़ा है जबरदस्त असर
एमडी टीवी नरेंद्रन और इडी कौशिक चटर्जी ने बताया कि रुस और यूक्रेन में छिड़े युद्ध के कारण असर पड़ा है. इन लोगों ने बतया कि रुस और यूक्रेन के युद्ध के पहले यूरोप सबसे ज्यादा स्टील का निर्यात करने वाला देश था, जिसमें अब कमी आ चुकी है. फिनिश्ड स्टील सबसे ज्यादा यूरोप ही खपत करता था. रुस दूसरा देश था, लेकिन अभी इस पर पूरी तरह असर पड़ चुका है. इन लोगों ने बताया कि रुस दूसरा सबसे ज्यादा सप्लायर था, जहां से कोल इंजेक्शन आता था, जो ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरा देश है, लेकिन अब रूस से सप्लाइ बंद हो चुका है. कीमतों में इजाफा हो रहा है, सप्लाइ रुक चुका है. कोकिंग कोल, आयरन ओर, नेचुरल गैस की सप्लाइ पर असर पड़ा है. अगर यह युद्ध और खींचा तो महंगाई से लेकर विकास दर में भी तेजी से गिरावट दर्ज होने लगेगी.





