
जमशेदपुर : टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने एक अप्रैल को नये वित्तीय वर्ष के स्वागत कार्यक्रम के दौरान केक काटने के बाद भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया. इसके तहत टाटा स्टील के एमडी ने भावी रुपरेखा की जानकारी दी और कहा कि चार कूंजी है, जिसके जरिए भविष्य के दरवाजे खुलेंगे.
पहली कूंजी-सर्कुलरिटी (सर्कुलर इकोनोमी यानी परिपत्र अर्थव्यवस्था)
एमडी ने कहा कि अगर टाटा स्टील को 2050 तक का सफर तय करना है तो उसे अभी से ही सर्कुलर इकोनोमी पर काम करना होगा, जिसमें हम सस्टेनेबल माइनिंग (स्थायी खनन) के साथ ही उत्पाद की लांगिटिविटी (लंबी संवेदनशीलता), रियूज (बेकार सामानों का फिर से उपयोग) और रिसाइक्लिंग (बेकार हो चुके सामान को नया स्वरुप देना) पर जोर हो. एमडी ने कहा कि संसाधनों की कमी के चलते हमें वैसे उत्पाद और माइनिंग पर जोर देना होगा, जिसका हम दोबारा इस्तेमाल कर सके.
दूसरी कूंजी-नॉलेज इन्टेंसिव (ज्ञान गहन)
एमडी ने कहा कि आने वाले दौर में हमें कैपिटल (पूंजी) इंटेसिंव की बजाय नॉलेज इंटेन्सिव होना होगा. हमें यह समझना होगा कि आने वाले दौर में नॉलेज ही नई करेंसी है और इससे हम पैसे कमा सकते हैं. ऐसे में हमें ज्यादा से ज्यादा नॉलेज में निवेश करना होगा. ऐसे में हमे विचार करना होगा कि हम अपने नॉलेज को कैसे अनलॉक सकते हैं? हमें वैसे क्षेत्र में काम करना होगा, जो नॉलेज ड्रिवेन है.
तीसरी कूंजी-सर्विसेस एंड सोल्यूशन्स (सेवा व सामाधान)
एमडी ने कहा कि हमारे भविष्य की कूंजी सर्विसेस और सोल्यूशन्स में होगी. हमारा काम केवल बेचना नहीं है. हमें ग्राहकों को सर्विसेस और उनकी समस्याओं के समाधान के जरिए उन्हें इंगेज्ड रखना होगा. हमें ऐसे सोल्यूशन्स देने होंगे, जो न केवल इनोवेटिव हो बल्कि कस्टमर डिजिटली उस सेवा का लाभ ले सके. इसके लिए जरूरी है कि हम अपने बिजनेस को अलग लेंस से देखें.
चौथी कूंजी-कम्युनिटी (समुदाय) को मदद
एमडी ने कहा कि हमारी चौथी कूंजी होगी कि हमारा अपने समुदाय से किस कदर जुड़ाव है. हमारा काम केवल स्टील बनाकर बेचना नहीं होगा, हमारा काम अपने समुदाय की बेहतरी भी करना होगा. इसके लिए हमें उनकी समस्याओं का समाधान करना होगा. श्री नरेन्द्रन ने कहा कि टाटा स्टील का अपने कम्युनिटी के साथ गहरा जुड़ाव रहा है और हम जानते हैं कि कम्युनिटी की असल समस्या क्या है? ऐसे में हम अपने अनुभव और जुड़ाव का लाभ उठा सकते हैं.
कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर होगा जोर
टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक (एमडी) टीवी नरेन्द्रन ने कहा कि कंपनी अगले दस साल में कार्बन फूटप्रिंट को 40 फीसदी से ज्यादा कम करेगी. इसके लिए कंपनी कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही है ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके. श्री नरेन्द्रन ने कहा कि अगर हमें अपने अस्तित्व को बनाए रखना है तो हमें इको फ्रेंडली बनना होगा और कार्बन के उत्सर्जन को कम करना होगा. एमडी ने कहा कि सरकार की भी कोशिश है कि कंपनियां ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करें, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक हो. उन्होंने बताया कि कंपनी के बिजनेस प्लान में भी सबसे ज्यादा जोर कार्बन के उत्सर्जन को कम करने को लेकर है. कार्बन के उत्सर्जन को कम करने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं लेकिन अभी हमें मीलों दूर चलना है. टाटा स्टील को सस्टेनेबिलिटी अवार्ड से लेकर लो कार्बन उत्सर्जन के लिए कई अवार्ड भी मिले हैं, लेकिन अभी सफर लंबा तय करना है. कंपनी को लो कार्बन फूटप्रिंट बनाने के लिए हमें एक जिम्मेवार कारपोरेट के रूप में काम करना होगा. हम यह नहीं चाहते हैं कि इसके लिए सरकार हमारे ऊपर नजर रखे और हम पर अंकुश लगाए. हम कार्बन उत्सर्जन को लेकर खुद जिम्मेवार बनना चाहते हैं और इसे अपने कल्चर का हिस्सा बनाना चाहते हैं. इसके लिए हम कंपनी में आरएंडडी (रिसर्च एंड डेवलेपमेंट) को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि ऐसी तकनीक का सहारा हम लें, जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके? इस बारे में हम पहले भी यूनियन को बताते रहे हैं और उन्हें इस बारे में प्रशिक्षित करते रहे हैं, लेकिन हमें इसे और आगे बढ़ाना है और प्रभावी तरीके से करना है, क्योंकि यह हमारे अस्तित्व का सवाल है. अगर इंडस्ट्री होगी, तो हम और आप रहेंगे.
टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन पर जोर
एमडी टीवी नरेन्द्रन ने कहा कि टाटा स्टील आने वाले दिनों में टेक्नोलॉजी (तकनीक) और इनोवेशन (नये खोज) पर जोर देगा. उन्होंने कंपनी के आरएंडडी हेड देवाशीष भट्टाचार्या और उनकी टीम को धन्यवाद दिया कि पिछले तीन साल में कंपनी इस क्षेत्र में काफी आगे बढ़ी है लेकिन हमें दुनिया में मोस्ट इनोवेटिव कंपनी बनना है. हमें कुछ ऐसे ब्रेकथ्रू इनोवेशन करने है जो दुनिया में मिसाल बने.
एजिलिटी बने हमारा डीएनए
एमडी ने कहा कि कंपनी का फोकस एरिया एजिलिटी है. हमारी कोशिश है कि यह हमारे डीएनए का हिस्सा बनें, क्योंकि कंपनी ने जो जर्नी (यात्रा) पूरी की है उसमें एजिलिटी की भूमिका अहम रही है. कोरोना महामारी में हमने अपनी एजिलिटी को बेहतर तरीके से शोकेस किया है. लेकिन हमारी कोशिश है कि अगले तीन-चार साल में कंपनी के डीएनए में एजिलिटी हो. इसके लिए हम वैसे लीडरों को सामने ला रहे हैं जो कंपनी को एजाइल बनाने में अहम भूमिका निभा सके. इसके लिए जिम्मेवार, रिस्पांसिव और कोलेबोरेट तरीके से काम करने वाले लीडर और टीम वर्क को प्रोत्साहित कर रहे हैं. हम ऐसे लीडरों और कोच को प्रमोट कर रहे हैं जो अपने अंदर के लोगों को एजाइल और कोलेबोरेट कर सके. एमडी ने कहा कि प्रोमोशन का मतलब प्रमोट होना नहीं है, प्रोमोशन अब उन्हीं का होगा, जो कंपनी को एजाइल बनाने और अपनी टीम को मोटिवेट करने का काम करेंगे. हमारी कोशिश है कि एक ऐसा एकाउंटेबल कल्चर बनाया जाय, जिसमें हर कोई अपने काम को लेकर जिम्मेवार हो.
शॉप फ्लोर में 25 फीसदी महिलाओं को रखा जाएगा
एमडी ने कहा कि हमारी कोशिश कंपनी को इन्क्लूसिव (समग्र) ऑर्गेनाइजेशन (संस्था) बनाने की है, ताकि हर तरह की विविधता (डायवर्सिटी) हो. हम इस डायवर्सिटी को प्रोमोट कर रहे हैं. यह डायवर्सिटी केवल जेंडर के स्तर पर नहीं की जा रही है. हमारी कोशिश है कि डिसेबल (विकलांग) लोगों के साथ ही अलग सोच के लोग एक साथ काम कर सके. इसके लिए हमारी कोशिश है कि हम पुराने माइंडसेट से बाहर निकले. ऑफिस में 40 फीसदी तक तो महिलाएं काम करती है लेकिन कोर एरिया यानि शॉप फ्लोर में अभी भी महिलाओं की संख्या बहुत कम है. क्या हम अपने कोर एरिया यानि माइनिंग और ऑपरेशन्स में भी महिलाओं को 25 फीसदी हिस्सेदारी नदीं दे सकते? इस पर टाटा स्टील गंभीरता से काम कर रही है. इसके लिए जरूरी है कि सरकार भी ऐसी नीति बनाएं, जिसमें महिलाओं के काम करने की संभावनाओं का विस्तार हो. यह तभी होगा, जब हम पुराने माइंडसेट से बाहर निकलेंगे.




